• पठान की बेगम(रोमांटिक होते हुए): सुनिए जी मुझे एक पप्पी चाहिए।<br/>
पठान: लो घर में खाने के लाले पड़े हैं, इनको कुत्ता रखना है।Upload to Facebook
    पठान की बेगम(रोमांटिक होते हुए): सुनिए जी मुझे एक पप्पी चाहिए।
    पठान: लो घर में खाने के लाले पड़े हैं, इनको कुत्ता रखना है।
  • सिंधी: तुम ये ईंट लिए क्यों फिर रहे हो?<br/>
पठान: कुछ नहीं यार, मैं अपना घर बेचना चाहता हूँ और ये उसका नमूना है।Upload to Facebook
    सिंधी: तुम ये ईंट लिए क्यों फिर रहे हो?
    पठान: कुछ नहीं यार, मैं अपना घर बेचना चाहता हूँ और ये उसका नमूना है।
  • सिंधी: ओये तू वहां कोने में क्यों बैठा है?<br/>
पठान: सर्दी बहुत है न इसलिए।<br/>
सिंधी: सर्दी है तो कोने में क्या तापमान ज्यादा है?<br/>
पठान: हाँ, तुम्हे नहीं पता कोना 90 डिग्री का होता है।Upload to Facebook
    सिंधी: ओये तू वहां कोने में क्यों बैठा है?
    पठान: सर्दी बहुत है न इसलिए।
    सिंधी: सर्दी है तो कोने में क्या तापमान ज्यादा है?
    पठान: हाँ, तुम्हे नहीं पता कोना 90 डिग्री का होता है।
  • पठान: मैंने आपकी दूकान से मुर्गी दाना खरीदा था।<br/>
दूकानदार: तो क्या हुआ, कुछ खराबी है क्या?<br/>
पठान: हाँ, एक महीना हो गया उसे खेत में बोये हुए, अभी तक मुर्गी नहीं उगी।Upload to Facebook
    पठान: मैंने आपकी दूकान से मुर्गी दाना खरीदा था।
    दूकानदार: तो क्या हुआ, कुछ खराबी है क्या?
    पठान: हाँ, एक महीना हो गया उसे खेत में बोये हुए, अभी तक मुर्गी नहीं उगी।
  • पठान: मैंने कल एक सपना देखा।<br/>
सिंधी: अच्छा क्या देखा सपने में?<br/>
पठान: यार कुछ दिखाई ही नहीं दिया।<br/>
सिंधी: क्यों?<br/>
पठान: वो मेरी आँखें बंद थी न, इसलिए।Upload to Facebook
    पठान: मैंने कल एक सपना देखा।
    सिंधी: अच्छा क्या देखा सपने में?
    पठान: यार कुछ दिखाई ही नहीं दिया।
    सिंधी: क्यों?
    पठान: वो मेरी आँखें बंद थी न, इसलिए।
  • पठान और सिंधी आपस में बातें कर रहे थे।<br/>
सिंधी: चल अपने बचपन की कोई बात बता?<br/>
पठान: यार, बचपन में... मैं बहुत ताक़तवर था।<br/>
सिंधी: अच्छा... वो कैसे?<br/>
पठान: अम्मी कहती है बचपन में जब मैं रोता था तो सारा घर सिर पर उठा लेता था।Upload to Facebook
    पठान और सिंधी आपस में बातें कर रहे थे।
    सिंधी: चल अपने बचपन की कोई बात बता?
    पठान: यार, बचपन में... मैं बहुत ताक़तवर था।
    सिंधी: अच्छा... वो कैसे?
    पठान: अम्मी कहती है बचपन में जब मैं रोता था तो सारा घर सिर पर उठा लेता था।
  • सिंधी(पठान से): यार तुम्हारा जन्मदिन कब आता है?<br/>
पठान: नहीं यार, मेरा जन्मदिन नहीं आता।<br/>
सिंधी: ऐसा कैसे हो सकता है? जन्मदिन तो सबका आता है।<br/>
पठान: वो मैं रात को पैदा हुआ था, इसलिए मेरा जन्म दिन नहीं आता।Upload to Facebook
    सिंधी(पठान से): यार तुम्हारा जन्मदिन कब आता है?
    पठान: नहीं यार, मेरा जन्मदिन नहीं आता।
    सिंधी: ऐसा कैसे हो सकता है? जन्मदिन तो सबका आता है।
    पठान: वो मैं रात को पैदा हुआ था, इसलिए मेरा जन्म दिन नहीं आता।
  • सिंधी(पठान से): और बताओ तुम्हारा भाई आज-कल क्या कर रहा है?<br/>
पठान: बस एक दुकान खोली थी, पर अब तो जेल में है।<br/>
सिंधी: जेल में, वो क्यों?<br/>
पठान: वो दुकान हथौड़े से खोली थी न।Upload to Facebook
    सिंधी(पठान से): और बताओ तुम्हारा भाई आज-कल क्या कर रहा है?
    पठान: बस एक दुकान खोली थी, पर अब तो जेल में है।
    सिंधी: जेल में, वो क्यों?
    पठान: वो दुकान हथौड़े से खोली थी न।
  • पठान डॉक्टर के पास गया और बोला, `डॉक्टर साहब मुझे लगता है मुझे जूतों से एलर्जी है।`<br/>
डॉक्टर: क्यों, ऐसा क्यों लगता है तुम्हें?<br/>
पठान: क्योंकि डॉक्टर साहब जब भी मैं जूते पहने सुबह उठता हूँ तो मेरा सिर बहुत दर्द करता है।Upload to Facebook
    पठान डॉक्टर के पास गया और बोला, "डॉक्टर साहब मुझे लगता है मुझे जूतों से एलर्जी है।"
    डॉक्टर: क्यों, ऐसा क्यों लगता है तुम्हें?
    पठान: क्योंकि डॉक्टर साहब जब भी मैं जूते पहने सुबह उठता हूँ तो मेरा सिर बहुत दर्द करता है।
  • सिंधी (पठान से): यार रेडियो और अखबार में क्या फर्क है?<br/>
पठान (बहुत सोचने के बाद): फर्क कुछ ज्यादा नहीं है, मिलती तो दोनों से खबरें ही हैं पर अख़बार रेडियो से ज्यादा फायदेमंद है।<br/>
सिंधी: वो कैसे?<br/>
पठान: यार अब रेडियो में तुम रोटियां तो नहीं लपेट सकते न।Upload to Facebook
    सिंधी (पठान से): यार रेडियो और अखबार में क्या फर्क है?
    पठान (बहुत सोचने के बाद): फर्क कुछ ज्यादा नहीं है, मिलती तो दोनों से खबरें ही हैं पर अख़बार रेडियो से ज्यादा फायदेमंद है।
    सिंधी: वो कैसे?
    पठान: यार अब रेडियो में तुम रोटियां तो नहीं लपेट सकते न।
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