• मेहनत सीढियों की तरह होती है और भाग्य लिफ्ट की तरह!<br/>
किसी समय लिफ्ट तो बंद हो सकती हैं लेकिन सीढियाँ हमेशा उँचाई की तरफ ले जाती हैं।
    मेहनत सीढियों की तरह होती है और भाग्य लिफ्ट की तरह!
    किसी समय लिफ्ट तो बंद हो सकती हैं लेकिन सीढियाँ हमेशा उँचाई की तरफ ले जाती हैं।
  • सीढियाँ उन्हें मुबारक हो जिन्हें सिर्फ छत तक जाना है;
    मेरी मंज़िल तो आसमान है रास्ता मुझे खुद बनाना है।
  • कर दिया है बेफिक्र तूने फ़िक्र अब मैं कैसे करूँ;<br/>
फ़िक्र तो यह है कि तेरा शुक्र कैसे करूँ।
    कर दिया है बेफिक्र तूने फ़िक्र अब मैं कैसे करूँ;
    फ़िक्र तो यह है कि तेरा शुक्र कैसे करूँ।
  • बीच रास्ते से लौटने का कोई फायदा नहीं क्योंकि लौटने पर आपको उतनी ही दूरी तय करनी पड़ेगी जितनी दूरी तय करने पर आप लक्ष्य तक पहुँच सकते है।
  • जब तक आप अपनी समस्याओं एंव कठिनाइयों की वजह दूसरों को मानते है, तब तक आप अपनी समस्याओं एंव कठिनाइयों को मिटा नहीं सकते।
  • हर सपने को अपनी साँसों में रखो;
    हर मंज़िल को अपनी बाहों में रखो;
    हर जीत आपकी ही है, बस अपने लक्ष्य को अपनी निगाहों में रखो।
  • सफल होने के लिए, सफलता की इच्छा, असफलता के भय से अधिक होनी चाहिए।
  • दुनिया विरोध करे तुम ङरो मत, क्योंकि जिस पेङ पर फल लगते हैं दुनिया उसे ही पत्थर मारती है।
    दुनिया विरोध करे तुम ङरो मत, क्योंकि जिस पेङ पर फल लगते हैं दुनिया उसे ही पत्थर मारती है।
  • समझदार वह व्यक्ति नहीं जो ईंट का जवाब पत्थर से दे।<br/>
समझदार वह है जो फेंकी हुई ईंट से अपना आशियाना बना ले।
    समझदार वह व्यक्ति नहीं जो ईंट का जवाब पत्थर से दे।
    समझदार वह है जो फेंकी हुई ईंट से अपना आशियाना बना ले।
  • होके मायूस ना यूँ शाम की तरह ढलते रहिये,<br/>
ज़िंदगी एक भोर है सूरज की तरह निकलते रहिये,<br/>
ठहरोगे एक पाँव पर तो थक जाओगे,<br/>
धीरे धीरे ही सही मगर राह पे चलते रहिये।
    होके मायूस ना यूँ शाम की तरह ढलते रहिये,
    ज़िंदगी एक भोर है सूरज की तरह निकलते रहिये,
    ठहरोगे एक पाँव पर तो थक जाओगे,
    धीरे धीरे ही सही मगर राह पे चलते रहिये।