• ज़िंदगी चाहे एक दिन की हो या चाहे चार दिन की,<br/>
उसे ऐसे जियो जैसे कि ज़िंदगी तुम्हें नहीं मिली, ज़िंदगी को तुम मिले हो।
    ज़िंदगी चाहे एक दिन की हो या चाहे चार दिन की,
    उसे ऐसे जियो जैसे कि ज़िंदगी तुम्हें नहीं मिली, ज़िंदगी को तुम मिले हो।
  • हार और जीत हमारी सोंच पर निर्भर है।<br/>
मान लिया तो हार और अगर ठान लिया तो जीत।
    हार और जीत हमारी सोंच पर निर्भर है।
    मान लिया तो हार और अगर ठान लिया तो जीत।
  • रेहमत खुदा की तेरी चौखट पे बरसती नज़र आये;<br/>
हर लम्हा तेरी तक़दीर संवरती नज़र आये;<br/>
बिन मांगे तुझे मिले तू जो चाहे;<br/>
कर कुछ ऐसा काम कि दुआ खुद तेरे हाथों को तरसती नज़र आये।
    रेहमत खुदा की तेरी चौखट पे बरसती नज़र आये;
    हर लम्हा तेरी तक़दीर संवरती नज़र आये;
    बिन मांगे तुझे मिले तू जो चाहे;
    कर कुछ ऐसा काम कि दुआ खुद तेरे हाथों को तरसती नज़र आये।
  • सीढ़ियाँ उनके लिए बनी हैं, जिन्हें छत पर जाना है,<br/>
लेकिन जिनकी नज़र, आसमान पर हो उन्हें तो रास्ता ख़ुद बनाना है।
    सीढ़ियाँ उनके लिए बनी हैं, जिन्हें छत पर जाना है,
    लेकिन जिनकी नज़र, आसमान पर हो उन्हें तो रास्ता ख़ुद बनाना है।
  • कागज़ अपनी किस्मत से उड़ता है और पतंग अपनी क़ाबलियत से!<br/>
किस्मत साथ दे या ना दे मगर क़ाबलियत ज़रूर साथ देगी।
    कागज़ अपनी किस्मत से उड़ता है और पतंग अपनी क़ाबलियत से!
    किस्मत साथ दे या ना दे मगर क़ाबलियत ज़रूर साथ देगी।
  • सूरज हर शाम को ढल ही जाता है,<br/>
पतझड़ बसंत में बदल ही जाता है,<br/>
मेरे मन मुसीबत में हिम्मत मत हारना,<br/>
समय कैसा भी हो गुज़र ही जाता है।
    सूरज हर शाम को ढल ही जाता है,
    पतझड़ बसंत में बदल ही जाता है,
    मेरे मन मुसीबत में हिम्मत मत हारना,
    समय कैसा भी हो गुज़र ही जाता है।
  • सोच को तुम अपनी ले जाओ शिखर तक;<br/>
कि उसके आगे सारे सितारे भी झुक जायें;<br/>
ना बनाओ अपने सफर को किसी कश्ती का मोहताज़;<br/>
चलो इस शान से कि तूफ़ान भी झुक जाये।
    सोच को तुम अपनी ले जाओ शिखर तक;
    कि उसके आगे सारे सितारे भी झुक जायें;
    ना बनाओ अपने सफर को किसी कश्ती का मोहताज़;
    चलो इस शान से कि तूफ़ान भी झुक जाये।
  • ज़िन्दगी उसी को आजमाती है;
    जो हर मोड़ पर चलना जानता है;
    कुछ खोकर तो हर कोई मुस्कुराता है;
    पर ज़िन्दगी उसी की है जो कुछ खोकर भी मुस्कुराना जानता है।
  • जो सिरफिरे होते हैं इतिहास वही लिखते हैं,<br />
समझदार लोग तो सिर्फ उनके बारे में पढते हैं,<br />
परख अगर हीरे की करनी है तो अंधेँरे का इंतज़ार करो,<br />
वरना धूप में तो काँच के टुकडे भी चमकते हैं।
    जो सिरफिरे होते हैं इतिहास वही लिखते हैं,
    समझदार लोग तो सिर्फ उनके बारे में पढते हैं,
    परख अगर हीरे की करनी है तो अंधेँरे का इंतज़ार करो,
    वरना धूप में तो काँच के टुकडे भी चमकते हैं।
  • खोकर पाने का मज़ा कुछ और ही है;<br />
रोकर मुस्कुराने का मज़ा कुछ और ही है;<br />
हार तो जिंदगी का हिस्सा है मेरे दोस्त;<br />
हारने के बाद जीतने का मज़ा कुछ और ही है।
    खोकर पाने का मज़ा कुछ और ही है;
    रोकर मुस्कुराने का मज़ा कुछ और ही है;
    हार तो जिंदगी का हिस्सा है मेरे दोस्त;
    हारने के बाद जीतने का मज़ा कुछ और ही है।
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT