• सोच को अपनी ले जाओ शिखर तक;<br />
कि उसके आगे सारे सितारे झुक जाएं;<br />
न बनाओ अपने सफ़र को किसी कश्ती का मोहताज़;<br />
चलो इस शान से कि तूफ़ान भी झुक जाए।
    सोच को अपनी ले जाओ शिखर तक;
    कि उसके आगे सारे सितारे झुक जाएं;
    न बनाओ अपने सफ़र को किसी कश्ती का मोहताज़;
    चलो इस शान से कि तूफ़ान भी झुक जाए।
  • तकदीर का इम्तिहान है जरा इंतजार करना;
    कुछ रब पे कुछ खुद पे ऐतबार करना;
    मंजिल जरूर मिलेगी आपको;
    बस अपनी इबादत बरकरार रखना।
  • स्वयं को कभी कमजोर साबित मत होने दें;<br />
क्योंकि;<br />
डूबते सूरज को देखकर लोग घरों के दरवाजे बंद करने लगते हैं।
    स्वयं को कभी कमजोर साबित मत होने दें;
    क्योंकि;
    डूबते सूरज को देखकर लोग घरों के दरवाजे बंद करने लगते हैं।
  • रात सुबह का इंतज़ार नहीं करती;
    खुशबु मौसम का इंतज़ार नहीं करती;
    जो भी ख़ुशी मिले उसका आनंद लिया करो;
    क्योंकि जिंदगी वक़्त का इंतज़ार नहीं करती।
  • अपनी जिंदगी के किसी भी दिन को मत कोसना;
    क्योंकि;
    अच्छा दिन खुशियाँ लाता है;
    और बुरा दिन अनुभव;
    एक सफल जिंदगी के लिए दोनों जरूरी होती हैं।
  • जो सपने देखने की हिम्मत रखते हैं;<br />
वो पूरी दुनिया जीत सकते हैं।
    जो सपने देखने की हिम्मत रखते हैं;
    वो पूरी दुनिया जीत सकते हैं।
  • मेरी मंजिल मेरे करीब है इसका मुझे 'एह्सास' है;
    गुमान नहीं मुझे इरादों पे अपने;
    ये मेरी 'सोच' और हौंसलों का 'विश्वास' है।
  • अपने मिशन में कामयाब होने के लिए, आपको अपने लक्ष्य के प्रति एकाग्रचित होना पड़ेगा।
    अपने मिशन में कामयाब होने के लिए, आपको अपने लक्ष्य के प्रति एकाग्रचित होना पड़ेगा।
  • टेढ़े के साथ टेढ़ा हो जाना तो जगत में सभी को आता है और यह स्वाभाविक ही है;
    लेकिन टेढ़े के साथ सीधा रहने का चमत्कार केवल ज्ञानी व्यक्ति ही कर पाते हैं।
  • क्या बनाने आये थे क्या बना बैठे;<br  />
कहीं मंदिर बना बैठे कहीं मस्जिद बना बैठे;<br  />
हमसे तो जात अच्छी है परिंदों की;<br  />
कभी मंदिर पर जा बैठे तो;<br  />
कभी मस्जिद पर जा बैठे।
    क्या बनाने आये थे क्या बना बैठे;
    कहीं मंदिर बना बैठे कहीं मस्जिद बना बैठे;
    हमसे तो जात अच्छी है परिंदों की;
    कभी मंदिर पर जा बैठे तो;
    कभी मस्जिद पर जा बैठे।