• सोच को अपनी ले जाओ शिखर तक;<br />
कि उसके आगे सारे सितारे झुक जाएं;<br />
न बनाओ अपने सफ़र को किसी कश्ती का मोहताज़;<br />
चलो इस शान से कि तूफ़ान भी झुक जाए।Upload to Facebook
    सोच को अपनी ले जाओ शिखर तक;
    कि उसके आगे सारे सितारे झुक जाएं;
    न बनाओ अपने सफ़र को किसी कश्ती का मोहताज़;
    चलो इस शान से कि तूफ़ान भी झुक जाए।
  • तकदीर का इम्तिहान है जरा इंतजार करना;
    कुछ रब पे कुछ खुद पे ऐतबार करना;
    मंजिल जरूर मिलेगी आपको;
    बस अपनी इबादत बरकरार रखना।
  • स्वयं को कभी कमजोर साबित मत होने दें;<br />
क्योंकि;<br />
डूबते सूरज को देखकर लोग घरों के दरवाजे बंद करने लगते हैं।Upload to Facebook
    स्वयं को कभी कमजोर साबित मत होने दें;
    क्योंकि;
    डूबते सूरज को देखकर लोग घरों के दरवाजे बंद करने लगते हैं।
  • रात सुबह का इंतज़ार नहीं करती;
    खुशबु मौसम का इंतज़ार नहीं करती;
    जो भी ख़ुशी मिले उसका आनंद लिया करो;
    क्योंकि जिंदगी वक़्त का इंतज़ार नहीं करती।
  • अपनी जिंदगी के किसी भी दिन को मत कोसना;
    क्योंकि;
    अच्छा दिन खुशियाँ लाता है;
    और बुरा दिन अनुभव;
    एक सफल जिंदगी के लिए दोनों जरूरी होती हैं।
  • जो सपने देखने की हिम्मत रखते हैं;<br />
वो पूरी दुनिया जीत सकते हैं।Upload to Facebook
    जो सपने देखने की हिम्मत रखते हैं;
    वो पूरी दुनिया जीत सकते हैं।
  • मेरी मंजिल मेरे करीब है इसका मुझे 'एह्सास' है;
    गुमान नहीं मुझे इरादों पे अपने;
    ये मेरी 'सोच' और हौंसलों का 'विश्वास' है।
  • अपने मिशन में कामयाब होने के लिए, आपको अपने लक्ष्य के प्रति एकाग्रचित होना पड़ेगा।Upload to Facebook
    अपने मिशन में कामयाब होने के लिए, आपको अपने लक्ष्य के प्रति एकाग्रचित होना पड़ेगा।
  • टेढ़े के साथ टेढ़ा हो जाना तो जगत में सभी को आता है और यह स्वाभाविक ही है;
    लेकिन टेढ़े के साथ सीधा रहने का चमत्कार केवल ज्ञानी व्यक्ति ही कर पाते हैं।
  • क्या बनाने आये थे क्या बना बैठे;<br  />
कहीं मंदिर बना बैठे कहीं मस्जिद बना बैठे;<br  />
हमसे तो जात अच्छी है परिंदों की;<br  />
कभी मंदिर पर जा बैठे तो;<br  />
कभी मस्जिद पर जा बैठे।Upload to Facebook
    क्या बनाने आये थे क्या बना बैठे;
    कहीं मंदिर बना बैठे कहीं मस्जिद बना बैठे;
    हमसे तो जात अच्छी है परिंदों की;
    कभी मंदिर पर जा बैठे तो;
    कभी मस्जिद पर जा बैठे।
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