• गुरूर टूट गया कोई मर्तबा ना मिला;<br/>
सितम के बाद भी कुछ हासिल जफ़ा ना मिला;<br/>
सिर-ए-हुसैन मिला है यज़ीद को लेकिन;<br/>
शिकस्त यह है कि फिर भी झुका हुआ ना मिला।
    गुरूर टूट गया कोई मर्तबा ना मिला;
    सितम के बाद भी कुछ हासिल जफ़ा ना मिला;
    सिर-ए-हुसैन मिला है यज़ीद को लेकिन;
    शिकस्त यह है कि फिर भी झुका हुआ ना मिला।
  • हम ने कब कहा है कि हमारे हैं या हुसैन;<br/>
हक़ की बात तुम कहो तो तुम्हारे हैं या हुसैन;<br/>
जिस ने नबी सा के दिल पे उतारी थी अय्यातें;<br/>
उस ने हमारे दिल में उतारे हैं या हुसैन।
    हम ने कब कहा है कि हमारे हैं या हुसैन;
    हक़ की बात तुम कहो तो तुम्हारे हैं या हुसैन;
    जिस ने नबी सा के दिल पे उतारी थी अय्यातें;
    उस ने हमारे दिल में उतारे हैं या हुसैन।
  • हुसैन तेरी अता का चश्मा दिलों के दामन भिगो रहा है;<br/>
ये आसमान पर उदास बादल तेरी मोहब्बत में रो रहा है;<br/>
सबा भी जो गुज़रे कर्बला से तो उसे कहता है अर्श वाला;<br/>
तू और धीरे गुज़र यहाँ मेरा हुसैन सो रहा है।
    हुसैन तेरी अता का चश्मा दिलों के दामन भिगो रहा है;
    ये आसमान पर उदास बादल तेरी मोहब्बत में रो रहा है;
    सबा भी जो गुज़रे कर्बला से तो उसे कहता है अर्श वाला;
    तू और धीरे गुज़र यहाँ मेरा हुसैन सो रहा है।
  • कटवा कर अपना सिर तुमने इस्लाम को बचा लिया;<br/>
तेरे हौंसले और हिम्मत ने सब को तेरे आगे झुका दिया;<br/>
ऐ हुसैन, क्या कहें अब उनको जो झुकाने आये थे जिस सिर को;<br/>
काट कर उसको उन्होंने खुद ही उसे उठा दिया।
    कटवा कर अपना सिर तुमने इस्लाम को बचा लिया;
    तेरे हौंसले और हिम्मत ने सब को तेरे आगे झुका दिया;
    ऐ हुसैन, क्या कहें अब उनको जो झुकाने आये थे जिस सिर को;
    काट कर उसको उन्होंने खुद ही उसे उठा दिया।
  • जन्नत की आरज़ू में कहाँ जा रहे हैं लोग;<br/>
जन्नत तो कर्बला में खरीदी हुसैन ने;<br/>
दुनिया-ओ-आखरत में जो रहना हो चैन से;<br/>
जीना अली से सीखो मरना हुसैन से।
    जन्नत की आरज़ू में कहाँ जा रहे हैं लोग;
    जन्नत तो कर्बला में खरीदी हुसैन ने;
    दुनिया-ओ-आखरत में जो रहना हो चैन से;
    जीना अली से सीखो मरना हुसैन से।
  • करीब अल्लाह के आओ तो कोई बात बने;<br/>
ईमान फिर से जगाओ तो कोई बात बने;<br/>
लहू जो बह गया कर्बला में;<br/>
उनके मकसद को समझो तो कोई बात बने।
    करीब अल्लाह के आओ तो कोई बात बने;
    ईमान फिर से जगाओ तो कोई बात बने;
    लहू जो बह गया कर्बला में;
    उनके मकसद को समझो तो कोई बात बने।
  • क्या जलवा कर्बला में दिखाया हुसैन ने;<br/>
सजदे में जा कर सिर कटाया हुसैन ने;<br/>
नेज़े पे सिर था और ज़ुबान पे अय्यातें;<br/>
क़ुरान इस तरह सुनाया हुसैन ने।
    क्या जलवा कर्बला में दिखाया हुसैन ने;
    सजदे में जा कर सिर कटाया हुसैन ने;
    नेज़े पे सिर था और ज़ुबान पे अय्यातें;
    क़ुरान इस तरह सुनाया हुसैन ने।
  • सजदे से कर्बला को बंदगी मिल गयी;<br/>
सब्र से उमत को ज़िन्दगी मिल गयी;<br/>
एक चमन फातिमा का उजड़ा;<br/>
मगर सारे इस्लाम को ज़िन्दगी मिल गयी!
    सजदे से कर्बला को बंदगी मिल गयी;
    सब्र से उमत को ज़िन्दगी मिल गयी;
    एक चमन फातिमा का उजड़ा;
    मगर सारे इस्लाम को ज़िन्दगी मिल गयी!
  • सिर गैर के आगे ना झुकाने वाला;<br/>
और नेज़े पे भी कुरान सुनाने वाला;<br/> 
इस्लाम से क्या पूछते हो कौन हुसैन;<br/> 
हुसैन है इस्लाम को इस्लाम बनाने वाला!
    सिर गैर के आगे ना झुकाने वाला;
    और नेज़े पे भी कुरान सुनाने वाला;
    इस्लाम से क्या पूछते हो कौन हुसैन;
    हुसैन है इस्लाम को इस्लाम बनाने वाला!
  • आँखों को कोई ख्वाब तो दिखायी दे;
    ताबीर में इमाम का जलवा दिखायी दे;
    ए! इब्न-ऐ-मुर्तज़ा;
    सूरज भी एक छोटा सा ज़रा दिखायी दे!
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