• मेरी आँखें तेरे दीदार को तरसती हैं;<br/>
मेरी नस-नस तेरे प्यार को तरसती हैं;<br/>
तू ही बता दे कि तुझे बताएं कैसे;<br/>
कि मेरी रूह तक तेरी याद में तड़पती है।
    मेरी आँखें तेरे दीदार को तरसती हैं;
    मेरी नस-नस तेरे प्यार को तरसती हैं;
    तू ही बता दे कि तुझे बताएं कैसे;
    कि मेरी रूह तक तेरी याद में तड़पती है।
  • उन हसीन पलों को याद कर रहे थे;<br/>
आसमान से आपकी बात कर रहे थे;<br/>
सुकून मिला जब हमें हवाओं ने बताया;<br/>
आप भी हमें याद कर रहे थे।
    उन हसीन पलों को याद कर रहे थे;
    आसमान से आपकी बात कर रहे थे;
    सुकून मिला जब हमें हवाओं ने बताया;
    आप भी हमें याद कर रहे थे।
  • कभी दिल को कभी शमा को जला कर रोये;<br/>
तेरी याद को दिल से लगा कर हम रोये;<br/>
रात की गोद में जब सो गयी सारी दुनिया;<br/>
चाँद को तेरी तस्वीर बना कर हम रोये।
    कभी दिल को कभी शमा को जला कर रोये;
    तेरी याद को दिल से लगा कर हम रोये;
    रात की गोद में जब सो गयी सारी दुनिया;
    चाँद को तेरी तस्वीर बना कर हम रोये।
  • दिल की बात किसी से कही नहीं जाती;<br/>
दिल की हालत अब हमसे सही नहीं जाती;<br/>
तड़पती तो होगी वो भी हमारी तरह;<br/>
वरना यूँ ही किसी की याद हर पल नहीं आती।
    दिल की बात किसी से कही नहीं जाती;
    दिल की हालत अब हमसे सही नहीं जाती;
    तड़पती तो होगी वो भी हमारी तरह;
    वरना यूँ ही किसी की याद हर पल नहीं आती।
  • कौन कहता है हम आपको याद नहीं करते;<br/>
करते तो हैं मगर इज़हार नहीं करते;<br/>
सोचते हैं कहीं यादें बिखर न जायें;<br/>
इसलिए हर बार दीदार नहीं करते।
    कौन कहता है हम आपको याद नहीं करते;
    करते तो हैं मगर इज़हार नहीं करते;
    सोचते हैं कहीं यादें बिखर न जायें;
    इसलिए हर बार दीदार नहीं करते।
  • दिल की ख्वाहिश को नाम क्या दूँ;<br/>
प्यार का उसे पैगाम क्या दूँ;<br/>
इस दिल में दर्द नहीं यादें हैं उसकी;<br/>
अब यादें ही मुझे दर्द दें तो इल्ज़ाम क्या दूँ।
    दिल की ख्वाहिश को नाम क्या दूँ;
    प्यार का उसे पैगाम क्या दूँ;
    इस दिल में दर्द नहीं यादें हैं उसकी;
    अब यादें ही मुझे दर्द दें तो इल्ज़ाम क्या दूँ।
  • यादों की भीड़ में आप की परछाई सी लगती है;
    कानों में कोई आवाज़ एक शहनाई सी लगती है;
    जब आप करीब हैं तो अपना सा लगता है;
    वर्ना सीने में सांस भी पराई सी लगती है।
  • बिखरे अश्कों के मोती हम पिरो न सके;<br/>
तेरी याद में सारी रात सो न सके;<br/>
मिट न जाये आँसुओं से याद;<br/>
यही सोच कर हम रो न सके।
    बिखरे अश्कों के मोती हम पिरो न सके;
    तेरी याद में सारी रात सो न सके;
    मिट न जाये आँसुओं से याद;
    यही सोच कर हम रो न सके।
  • अजीब लगती है शाम कभी-कभी;<br/>
ज़िंदगी लगती है बेजान कभी-कभी;<br/>
समझ आये तो हमें भी बताना;<br/>
कि क्यों करती हैं यादें परेशान कभी-कभी।
    अजीब लगती है शाम कभी-कभी;
    ज़िंदगी लगती है बेजान कभी-कभी;
    समझ आये तो हमें भी बताना;
    कि क्यों करती हैं यादें परेशान कभी-कभी।
  • एक आरज़ू सी है कि उन्हें भूल जाएँ हम;<br/>
मगर उनकी यादों के आगे तो यह हसरत भी हार जाती है।
    एक आरज़ू सी है कि उन्हें भूल जाएँ हम;
    मगर उनकी यादों के आगे तो यह हसरत भी हार जाती है।
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT