• रिश्ते और रास्ते एक ही सिक्के के दो पहलू हैं;<br />
कभी रिश्ते निभाते निभाते रास्ते खो जाते हैं;<br />
और कभी रास्ते पर चलते चलते रिश्ते बन जाते हैं।
    रिश्ते और रास्ते एक ही सिक्के के दो पहलू हैं;
    कभी रिश्ते निभाते निभाते रास्ते खो जाते हैं;
    और कभी रास्ते पर चलते चलते रिश्ते बन जाते हैं।
  • कुछ मीठे पल याद आते हैं;<br />
पलकों पर आँसू छोड़ जाते हैं;<br />
कल कोई और मिल जाये तो हमें न भूलना;<br />
क्योंकि कुछ रिश्ते उम्र भर काम आते हैं।
    कुछ मीठे पल याद आते हैं;
    पलकों पर आँसू छोड़ जाते हैं;
    कल कोई और मिल जाये तो हमें न भूलना;
    क्योंकि कुछ रिश्ते उम्र भर काम आते हैं।
  • ना छुपाना कोई बात दिल में हो अगर;<br />
रखना थोड़ा भरोसा हम पर;<br />
हम निभाएंगे प्यार का यह रिश्ता इस कदर;<br />
कि भुलाने पर भी ना भुला पाओगे हमें ज़िंदगी भर।
    ना छुपाना कोई बात दिल में हो अगर;
    रखना थोड़ा भरोसा हम पर;
    हम निभाएंगे प्यार का यह रिश्ता इस कदर;
    कि भुलाने पर भी ना भुला पाओगे हमें ज़िंदगी भर।
  • दूर हो जाने से रिश्ते नहीं टूटते;<br />
न ही सिर्फ पास रहने से जुड़ते हैं;<br />
ये तो दिलों के बंधन हैं इसलिए;<br />
हम तुम्हें और तुम हमें नहीं भूलते।
    दूर हो जाने से रिश्ते नहीं टूटते;
    न ही सिर्फ पास रहने से जुड़ते हैं;
    ये तो दिलों के बंधन हैं इसलिए;
    हम तुम्हें और तुम हमें नहीं भूलते।
  • कोई टूटे तो उसे बनाना सीखो;<br />
कोई रूठे तो उसे मनाना सीखो;<br />
रिश्ते तो मिलते हैं मुक़द्दर से बस;<br />
उन्हें ख़ूबसूरती से निभाना सीखो।
    कोई टूटे तो उसे बनाना सीखो;
    कोई रूठे तो उसे मनाना सीखो;
    रिश्ते तो मिलते हैं मुक़द्दर से बस;
    उन्हें ख़ूबसूरती से निभाना सीखो।
  • यहाँ कौन किसका रकीब होता है;<br />
कौन किसका हबीब होता है;<br />
बन जाते हैं रिश्ते इस दुनिया में;<br />
जहाँ जहाँ जिसका नसीब होता है।
    यहाँ कौन किसका रकीब होता है;
    कौन किसका हबीब होता है;
    बन जाते हैं रिश्ते इस दुनिया में;
    जहाँ जहाँ जिसका नसीब होता है।
  • दौलत की भूख ऐसी थी कि कमाने निकल गए;<br />
दौलत मिली तो हाथ से रिश्ते निकल गए;<br />
बच्चों के साथ रहने की फुर्सत ना मिल सकी;<br />
और जब फुर्सत मिली तो बच्चे खुद ही दौलत कमाने निकल गए।
    दौलत की भूख ऐसी थी कि कमाने निकल गए;
    दौलत मिली तो हाथ से रिश्ते निकल गए;
    बच्चों के साथ रहने की फुर्सत ना मिल सकी;
    और जब फुर्सत मिली तो बच्चे खुद ही दौलत कमाने निकल गए।
  • रिश्ते काँच की तरह होते हैं;<br/>
टूटे जाए तो चुभते हैं;<br/>
इन्हे संभालकर हथेली पर सजाना;<br/>
क्योंकि इन्हें टूटने मे एक पल;<br/>
और बनाने मे बरसो लग जाते हैं।
    रिश्ते काँच की तरह होते हैं;
    टूटे जाए तो चुभते हैं;
    इन्हे संभालकर हथेली पर सजाना;
    क्योंकि इन्हें टूटने मे एक पल;
    और बनाने मे बरसो लग जाते हैं।
  • स्वार्थ से रिश्ते बनाने की कितनी भी कोशिश करो यह बनेगा नहीं,<br/>
और प्यार से बने रिश्ते को तोड़ने की कितनी भी कोशिश करो यह टूटेगा नहीं।
    स्वार्थ से रिश्ते बनाने की कितनी भी कोशिश करो यह बनेगा नहीं,
    और प्यार से बने रिश्ते को तोड़ने की कितनी भी कोशिश करो यह टूटेगा नहीं।
  • जीवन में ज़ख़्म बड़े नहीं होते, उनको भरने वाले बड़े होते हैं;<br/>
रिश्ते बड़े नहीं होते लेकिन उनको निभाने वाले लोग बड़े होते हैं।
    जीवन में ज़ख़्म बड़े नहीं होते, उनको भरने वाले बड़े होते हैं;
    रिश्ते बड़े नहीं होते लेकिन उनको निभाने वाले लोग बड़े होते हैं।
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