• उदासियों की वजह तो बहुत है जिंदगी में;
    पर बेवजह खुश रहने का मज़ा ही कुछ और है।
    इसलिए हमेशा खुश रहो।
    सुप्रभात!
  • खिलते फूल जैसे लबों पर हंसी हो;<br/>
ना कोई गम हो ना कोई बेबसी हो;<br/>
सलामत रहे ज़िंदगी का यह सफ़र;<br/>
जहाँ आप रहो वहाँ बस ख़ुशी ही ख़ुशी हो।<br/>
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    खिलते फूल जैसे लबों पर हंसी हो;
    ना कोई गम हो ना कोई बेबसी हो;
    सलामत रहे ज़िंदगी का यह सफ़र;
    जहाँ आप रहो वहाँ बस ख़ुशी ही ख़ुशी हो।
    सुप्रभात!
  • तब तक कमाओ जब तक महंगी चीज़ सस्ती ना लगने लगे;<br/>
चाहे वो सम्मान हो या सामान।<br/>
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    तब तक कमाओ जब तक महंगी चीज़ सस्ती ना लगने लगे;
    चाहे वो सम्मान हो या सामान।
    सुप्रभात!
  • सकारात्मक सोच आपके जीवन को सही दिशा देती है।<br/>
सही सोचें, सही समझें, सही दिशा मे बढें।<br/>
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    सकारात्मक सोच आपके जीवन को सही दिशा देती है।
    सही सोचें, सही समझें, सही दिशा मे बढें।
    सुप्रभात!
  • दो पल की ज़िन्दगी है इसे जीने के सिर्फ दो असूल बना लो,<br/>
रहो तो फूलों की तरह और बिखरो तो खुशबू की तरह।<br/>
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    दो पल की ज़िन्दगी है इसे जीने के सिर्फ दो असूल बना लो,
    रहो तो फूलों की तरह और बिखरो तो खुशबू की तरह।
    सुप्रभात!
  • स्वर्ग का सपना छोड़ दो,<br/>
नरक का डर छोड़ दो,<br/>
कौन जाने क्या पाप, क्या पुण्य,<br/>
बस किसी का दिल न दुखे अपने स्वार्थ के लिए,<br/>
बाक़ी सब कुदरत पर छोड़ दो।<br/>
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    स्वर्ग का सपना छोड़ दो,
    नरक का डर छोड़ दो,
    कौन जाने क्या पाप, क्या पुण्य,
    बस किसी का दिल न दुखे अपने स्वार्थ के लिए,
    बाक़ी सब कुदरत पर छोड़ दो।
    सुप्रभात!
  • ज़िन्दगी तब बेहतर होती है जब हम खुश होते हैं,<br/>
लेकिन यकीन करो ज़िन्दगी तब बेहतरीन हो जाती है जब हमारी वजह से सब खुश होते हैं।<br/>
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    ज़िन्दगी तब बेहतर होती है जब हम खुश होते हैं,
    लेकिन यकीन करो ज़िन्दगी तब बेहतरीन हो जाती है जब हमारी वजह से सब खुश होते हैं।
    सुप्रभात!
  • दौलत छोड़ी दुनिया छोड़ी सारा खज़ाना छोड़ दिया;<br/>
सतगुरु के प्यार में दीवानों ने राज घराना छोड़ दिया;<br/>
दरवाज़े पे जब लिखा हमने नाम हमारे सतगुरु का;<br/>
मुसीबत ने दरवाज़े पे आना छोड़ दिया।<br/>
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    दौलत छोड़ी दुनिया छोड़ी सारा खज़ाना छोड़ दिया;
    सतगुरु के प्यार में दीवानों ने राज घराना छोड़ दिया;
    दरवाज़े पे जब लिखा हमने नाम हमारे सतगुरु का;
    मुसीबत ने दरवाज़े पे आना छोड़ दिया।
    सुप्रभात!
  • देर मैंने ही लगाई पहचानने में ऐ भगवान,<br/>
वरना तुमने जो दिया उसका तो कोई हिसाब ही नहीं;<br/>
जैसे जैसे मैं सिर को झुकाता चला गया,<br/>
वैसे वैसे तू मुझे उठाता चला गया।<br/>
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    देर मैंने ही लगाई पहचानने में ऐ भगवान,
    वरना तुमने जो दिया उसका तो कोई हिसाब ही नहीं;
    जैसे जैसे मैं सिर को झुकाता चला गया,
    वैसे वैसे तू मुझे उठाता चला गया।
    सुप्रभात!
  • भाग्य से जितना अधिक उम्मीद करेंगे वह उतना ही निराश करेगा।<br/>
कर्म में विश्वास रखें, आपको अपनी अपेक्षाओं से सदैव अधिक मिलेगा।<br/>
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    भाग्य से जितना अधिक उम्मीद करेंगे वह उतना ही निराश करेगा।
    कर्म में विश्वास रखें, आपको अपनी अपेक्षाओं से सदैव अधिक मिलेगा।
    सुप्रभात!
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