• हम रूठें तो किस के भरोसे;
    कौन है जो आएगा हमें मनाने के लिए;
    हो सकता है तरस आ भी जाए आपको;
    पर दिल कहाँ से लाऊँ आपसे रूठ जाने के लिए।
  • जब भी आपसे मिलने की तक़दीर नज़र आई;
    मुझे पाँव में बँधी ज़ंजीर नज़र आई;
    तेरी याद में निकल पड़े मेरे आँसू;
    हर आँसू में तेरी तस्वीर नज़र आई।
  • तमाम उम्र ज़िंदगी से दूर रहे;
    तेरी ख़ुशी के लिए तुझसे दूर रहे;
    अब इस से बढ़कर वफ़ा की सज़ा क्या होगी;
    कि तेरे होकर भी तुझसे दूर रहे।
  • कभी पसंद न आये साथ मेरा तो बता देना, ए दोस्त;
    हम दिल पर पत्थर रख के तुम्हे
    .
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    गोली मार देंगे!
    बड़े आये, नापसंद करने वाले!
  • सच्चे प्यार में निकले आंसू और बच्चे के आंसू एक सामान होते हैं;
    क्योंकि दोनों को पता है कि दर्द क्या है, पर किसी को बता नहीं सकते।
  • अगर मेरी याद आए तो चाँद को देख लेना;<br/>
ये सोच कर नहीं कि खूबसूरत है कितना;<br/>
बल्कि यह सोच कर कि हज़ारों सितारों में तन्हा है कितना।
    अगर मेरी याद आए तो चाँद को देख लेना;
    ये सोच कर नहीं कि खूबसूरत है कितना;
    बल्कि यह सोच कर कि हज़ारों सितारों में तन्हा है कितना।
  • मित्रता शुद्धतम प्रेम है;<br/>
ये प्रेम का सर्वोच्च रूप है;<br/>
जहाँ कुछ भी नहीं माँगा जाता;<br/>
कोई शर्त नहीं होती;<br/>
जहां बस देने में आनंद आता है।
    मित्रता शुद्धतम प्रेम है;
    ये प्रेम का सर्वोच्च रूप है;
    जहाँ कुछ भी नहीं माँगा जाता;
    कोई शर्त नहीं होती;
    जहां बस देने में आनंद आता है।
  • लोग रूप देखते हैं, हम दिल देखते हैं;<br/>
लोग सपना देखते हैं, हम हक़ीकत देखते हैं;<br/>
लोग दुनियां देखते हैं;<br />
और हम दोस्त में अपनी दुनियां देखते हैं।
    लोग रूप देखते हैं, हम दिल देखते हैं;
    लोग सपना देखते हैं, हम हक़ीकत देखते हैं;
    लोग दुनियां देखते हैं;
    और हम दोस्त में अपनी दुनियां देखते हैं।
  • ग़म में हँसने वालों को रुलाया नहीं जाता;
    लहरों से पानी को हटाया नहीं जाता;
    होने वाले हो जाते हैं खुद ही अपने;
    किसी को कह कर अपना बनाया नहीं जाता।
  • जब प्यार के एहसास को समझ जाओगे;<br/>
हर तरफ मेरा ही नाम पाओगे;<br/>
मेरी मोहब्बत उस वक़्त देगी आवाज़;<br/>
जब तुम भीड़ में खुद को अकेला पाओगे।
    जब प्यार के एहसास को समझ जाओगे;
    हर तरफ मेरा ही नाम पाओगे;
    मेरी मोहब्बत उस वक़्त देगी आवाज़;
    जब तुम भीड़ में खुद को अकेला पाओगे।