• किये होंगे कुछ अलग से गुनाह हम सब ने;<br/>
इसीलिए गंगाजल की बजाय... हाथ मदिरा से धोने पड़ रहे हैं।
    किये होंगे कुछ अलग से गुनाह हम सब ने;
    इसीलिए गंगाजल की बजाय... हाथ मदिरा से धोने पड़ रहे हैं।
  • किसी से उम्मीद लगाने से बेहतर है मुल्तानी मिट्टी लगा लो!<br/>
रंग भी निखर जायेगा और और दिल को भी सुकून मिलेगा!
    किसी से उम्मीद लगाने से बेहतर है मुल्तानी मिट्टी लगा लो!
    रंग भी निखर जायेगा और और दिल को भी सुकून मिलेगा!
  • सुना है ज़िन्दगी इम्तिहान लेती है;<br/>
लेकिन यहाँ तो इम्तिहानों ने ज़िन्दगी ले ली है!
    सुना है ज़िन्दगी इम्तिहान लेती है;
    लेकिन यहाँ तो इम्तिहानों ने ज़िन्दगी ले ली है!
  • हमको अपनी अच्छाई पर ग़ुरूर नहीं करना चाहिये!<br/>
क्योंकि किसी की कहानी में शायद हम भी ग़लत हैं!
    हमको अपनी अच्छाई पर ग़ुरूर नहीं करना चाहिये!
    क्योंकि किसी की कहानी में शायद हम भी ग़लत हैं!
  • लॉकडाउन ख़त्म होने का इंतज़ार सिर्फ आप ही नहीं 'कोरोना' भी कर रहा है!<br/>
सतर्कता रखिये और सुरक्षित रहें!
    लॉकडाउन ख़त्म होने का इंतज़ार सिर्फ आप ही नहीं 'कोरोना' भी कर रहा है!
    सतर्कता रखिये और सुरक्षित रहें!
  • महफूज़ सारे बादशाह वज़ीर और शहज़ादे हैं;<br/>
जो बेघर हैं इस तूफ़ान में वो महज़ पयादे हैं!
    महफूज़ सारे बादशाह वज़ीर और शहज़ादे हैं;
    जो बेघर हैं इस तूफ़ान में वो महज़ पयादे हैं!
  • पहले कमाने जाते थे तो ठंडी रोटी मिलती थी!<br/>
अब नहीं कमा रहे हैं तो गरमा गरम रोटी मिल रही है!<br/>
वाह रे ईश्वर, तेरी माया!
    पहले कमाने जाते थे तो ठंडी रोटी मिलती थी!
    अब नहीं कमा रहे हैं तो गरमा गरम रोटी मिल रही है!
    वाह रे ईश्वर, तेरी माया!
  • जीवन के तीन पड़ाव हैं!<br/><br/>

1. जन्म<br/>
2. ये क्या हो रहा है<br/>
3. मृत्यु<br/><br/>
और हम दूसरे पड़ाव पर हैं!
    जीवन के तीन पड़ाव हैं!

    1. जन्म
    2. ये क्या हो रहा है
    3. मृत्यु

    और हम दूसरे पड़ाव पर हैं!
  • अवसर और सूर्योदय में एक ही समानता है कि देर करने वाले, इन्हें हमेशा खो देते हैं!
    अवसर और सूर्योदय में एक ही समानता है कि देर करने वाले, इन्हें हमेशा खो देते हैं!
  • `धर्म-अधर्म` सिर्फ सुखों के समय में दिखता है।<br/>
मुसीबत में तो सिर्फ `इंसानियत` का, धर्म काम आता है।
    "धर्म-अधर्म" सिर्फ सुखों के समय में दिखता है।
    मुसीबत में तो सिर्फ "इंसानियत" का, धर्म काम आता है।