• बहुत चंचल, बहुत खुशनुमा सी होती है बहन,<br/>
नाज़ुक सा दिल रखती है, मासूम सी होती है बहन,<br/>
बात-बात पे रो देती है, झगड़ती है, लड़ती है,<br/>
लेकिन फिर भी सबसे प्यारी होती है बहन।<br/>
मेरी प्यारी बहन को सिस्टर्स डे की शुभ कामनायें!
    बहुत चंचल, बहुत खुशनुमा सी होती है बहन,
    नाज़ुक सा दिल रखती है, मासूम सी होती है बहन,
    बात-बात पे रो देती है, झगड़ती है, लड़ती है,
    लेकिन फिर भी सबसे प्यारी होती है बहन।
    मेरी प्यारी बहन को सिस्टर्स डे की शुभ कामनायें!
  • दूर हो जाने से भाई-बहन का प्यार कभी कम नहीं होता;<br/>
तुझे याद न करूँ, ऐसा कोई मौसम नहीं होता;<br/>
यह वो रिश्ता है जो उम्र भर महकता है;<br/>
तेरा हाथ सर पर हो तो मुश्किलों में भी ग़म नहीं होता।<br/>
सिस्टर्स डे की शुभ कामनायें!
    दूर हो जाने से भाई-बहन का प्यार कभी कम नहीं होता;
    तुझे याद न करूँ, ऐसा कोई मौसम नहीं होता;
    यह वो रिश्ता है जो उम्र भर महकता है;
    तेरा हाथ सर पर हो तो मुश्किलों में भी ग़म नहीं होता।
    सिस्टर्स डे की शुभ कामनायें!
  • हरियाणवी: के करे है बेटा?<br/>
लड़का: सिविल इंजीनियर हूँ।<br/>
हरियाणवी: वो के होवे से?<br/>
लड़का: Building बनाता हूँ।<br/>
हरियाणवी: अच्छा, मिस्त्री है।
    हरियाणवी: के करे है बेटा?
    लड़का: सिविल इंजीनियर हूँ।
    हरियाणवी: वो के होवे से?
    लड़का: Building बनाता हूँ।
    हरियाणवी: अच्छा, मिस्त्री है।
  • ज़िंदगी में आगे बढ़ना है तो एक बात गांठ बांध लो।<br/>
Excuse Me बोलते जाओ, आगे बढ़ते जाओ।
    ज़िंदगी में आगे बढ़ना है तो एक बात गांठ बांध लो।
    Excuse Me बोलते जाओ, आगे बढ़ते जाओ।
  • कुछ लोग खाने के इतने शौक़ीन होते हैं कि,<br/>
वो दूसरों की खुशियाँ भी खा जाते हैं।
    कुछ लोग खाने के इतने शौक़ीन होते हैं कि,
    वो दूसरों की खुशियाँ भी खा जाते हैं।
  • हरियाणा रोडवेज की बस में लिखा था। किसी भी अनजान व्यक्ति से कोई चीज़ ना लें, फेर के था...<br/>
मनें तो फेर टिकट भी ना ली।
    हरियाणा रोडवेज की बस में लिखा था। किसी भी अनजान व्यक्ति से कोई चीज़ ना लें, फेर के था...
    मनें तो फेर टिकट भी ना ली।
  • बचपन की जिद्द समझौते में बदल जाती है,<br/>
उम्र बदलने के साथ।
    बचपन की जिद्द समझौते में बदल जाती है,
    उम्र बदलने के साथ।
  • आदमी ही आदमी का रास्ता काट रहा है,<br/>
बिल्लियाँ तो बेचारी बेरोज़गार बैठी हैं।
    आदमी ही आदमी का रास्ता काट रहा है,
    बिल्लियाँ तो बेचारी बेरोज़गार बैठी हैं।
  • नीचे गिरे सूखे पत्तों पर अदब से चलना ज़रा,<br/>
कभी कड़ी धूप में तुमने इनसे ही पनाह माँगी थी।
    नीचे गिरे सूखे पत्तों पर अदब से चलना ज़रा,
    कभी कड़ी धूप में तुमने इनसे ही पनाह माँगी थी।
  • `शेरों` की तरह जीते थे जब तक कमाते नहीं थे।<br/>
जब कमाना शुरू किया ज़िंदगी `शेरू` की तरह हो गई।
    "शेरों" की तरह जीते थे जब तक कमाते नहीं थे।
    जब कमाना शुरू किया ज़िंदगी "शेरू" की तरह हो गई।
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