• नीचे गिरे सूखे पत्तों पर अदब से चलना ज़रा,<br/>
कभी कड़ी धूप में तुमने इनसे ही पनाह माँगी थी।
    नीचे गिरे सूखे पत्तों पर अदब से चलना ज़रा,
    कभी कड़ी धूप में तुमने इनसे ही पनाह माँगी थी।
  • `शेरों` की तरह जीते थे जब तक कमाते नहीं थे।<br/>
जब कमाना शुरू किया ज़िंदगी `शेरू` की तरह हो गई।
    "शेरों" की तरह जीते थे जब तक कमाते नहीं थे।
    जब कमाना शुरू किया ज़िंदगी "शेरू" की तरह हो गई।
  • सीढियाँ उन्हें मुबारक हो जिन्हें सिर्फ छत तक जाना है;
    मेरी मंज़िल तो आसमान है रास्ता मुझे खुद बनाना है।
  • बचपन के वो दिन भी क्या खूब थे;<br/>
ना दोस्ती का मतलब पता था, ना मतलब की दोस्ती थी।
    बचपन के वो दिन भी क्या खूब थे;
    ना दोस्ती का मतलब पता था, ना मतलब की दोस्ती थी।
  • जिंदगी मे चुनौतियाँ हर किसी के हिस्से नहीं आती,
    क्योंकि किस्मत भी किस्मत वालों को ही आज़माती है।
  • ज़रूरी नहीं कि हर समय लबों पर भगवान का नाम आये,
    वो लम्हा भी भक्ति से कम नहीं जब इंसान इंसान के काम आये।
  • जाट: तू व्हाट्सएप्प पर है के?
    जाटणी: ना, मैं तो म्हारै घरां हूँ।
    जाट: मैरो मतलब है, व्हाट्सएप्प यूज करै है के?
    जाटणी: ना रै, मैं तो फेयर लवली यूज करुं हूँ।
    जाट: अरै बावली, व्हाट्सएप्प चलावै है के?
    जाटणी: ना रै बावला, मेरै कनै तो साईकल है, बा ही चलाऊँ हूँ।
    जाट: मेरी माँ, व्हाट्सएप्प चलाणो आवै है के तनै?
    जाटणी: तू चला लेयी, मैं पीछै बैठ ज्याऊँगी।
  • कर्मों से ही पहचान होती है इंसानों की क्योंकि महेंगे कपडे तो 'पुतले' भी पहनते है दुकानों में।
    कर्मों से ही पहचान होती है इंसानों की क्योंकि महेंगे कपडे तो 'पुतले' भी पहनते है दुकानों में।
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जाटों को आरक्षण की जरुरत नही है।<br/>
इस पर हरियाणा के एक ताऊ का कहना है,<br/>
`हम्णे भी सुप्रीम कोर्ट की जरुरत ना है`।
    सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जाटों को आरक्षण की जरुरत नही है।
    इस पर हरियाणा के एक ताऊ का कहना है,
    "हम्णे भी सुप्रीम कोर्ट की जरुरत ना है"।
  • इंसान के अंदर जो समा कर रहे वह स्वाभिमान है और जो बाहर छलके वो अभिमान है।
    इंसान के अंदर जो समा कर रहे वह स्वाभिमान है और जो बाहर छलके वो अभिमान है।