• सर्दियों के लिए विशेष:<br/>
चूत मारने का मज़ा भी तभी आता है ग़ालिब,<br/>
जब, मौसम हो जाड़े का और भोसड़ा हो भाड़े का।
    सर्दियों के लिए विशेष:
    चूत मारने का मज़ा भी तभी आता है ग़ालिब,
    जब, मौसम हो जाड़े का और भोसड़ा हो भाड़े का।
  • बारिश हो और ज़मीन गीली न हो;
    धुप निकले और सरसों पीली न हो;
    तो फिर आपने यह कैसे सोच लिया कि;
    नींद मे आप की याद आये और सलवार गीली न हो!
  • इस सुहाने मौसम में तुम्हारा साथ हो;
    गर्म बिस्तर में कम्बल ओढ़े तुम पास हो;
    मेरे होंट तुम्हें छूने को तरसें;
    काश ऐसा भी एहसास हो!
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