• वो बोली,<br/>
`नकाब में भी पहचान लेते हो हज़ारों में हमें खड़े-खड़े!`<br/>
हमने मुस्कुरा के कहा, `आपके हैं ही इतने बड़े-बड़े!`
    वो बोली,
    "नकाब में भी पहचान लेते हो हज़ारों में हमें खड़े-खड़े!"
    हमने मुस्कुरा के कहा, "आपके हैं ही इतने बड़े-बड़े!"
  • अर्ज़ किया है:<br/>
खुदा बचाये हमें इन हसीनों से,<br/>
खुदा बचाये हमें इन हसीनो से,<br/>
लेकिन इन हसीनों को कौन बचाये, हम जैसे कमीनो से।
    अर्ज़ किया है:
    खुदा बचाये हमें इन हसीनों से,
    खुदा बचाये हमें इन हसीनो से,
    लेकिन इन हसीनों को कौन बचाये, हम जैसे कमीनो से।
  • अपने उसूल मुझे कल यूँ भी तोड़ने पड़े;<br/>
बात चूत की थी इसलिए मुझे हाथ जोड़ने पड़े!
    अपने उसूल मुझे कल यूँ भी तोड़ने पड़े;
    बात चूत की थी इसलिए मुझे हाथ जोड़ने पड़े!
  • तीर क्यों चलाती हो, जब धार है तलवार में;<br/>
चुचे क्यों दिखाती हो, जब माल है सलवार में।
    तीर क्यों चलाती हो, जब धार है तलवार में;
    चुचे क्यों दिखाती हो, जब माल है सलवार में।
  • यादों की गहराई में लगा हूँ मैं खोने,
    अब जा रहा हूँ हिला कर मैं सोने!
  • ना प्यार की खुशी न ब्रेकअप का दुख;
    सिंगल रहो और दबाकर मारो मुठ!
  • जब से हुआ है तेरी चूत का दीदार,<br/>
मेरा लंड ऐसे खडा है जैसे चीन की दीवार।
    जब से हुआ है तेरी चूत का दीदार,
    मेरा लंड ऐसे खडा है जैसे चीन की दीवार।
  • अर्ज़ किया है:<br/>
उसने होंठों से छू कर लौड़े पे नशा कर दिया;<br/>
लंड की बात तो और थी यारो उसने तो झांटों को भी खड़ा कर दिया।
    अर्ज़ किया है:
    उसने होंठों से छू कर लौड़े पे नशा कर दिया;
    लंड की बात तो और थी यारो उसने तो झांटों को भी खड़ा कर दिया।
  • मोहब्बत के सिवा और भी गम है जमाने में;<br/>
चुत का भौसडा बन जाता है पैसा कमाने में।
    मोहब्बत के सिवा और भी गम है जमाने में;
    चुत का भौसडा बन जाता है पैसा कमाने में।
  • चोदते चोदते सुबह हो गयी लंड पे पड़ गए छाले;<br/>
चूत फट के गुफा हो गयी वाह रे चोदने वाले!
    चोदते चोदते सुबह हो गयी लंड पे पड़ गए छाले;
    चूत फट के गुफा हो गयी वाह रे चोदने वाले!