• शाश्वत सत्य वचन!

    लीजिये कुछ शाश्वत सत्य वचन:

    1. अगर किसी लडके ने किसी लड़की से 'हाय/हैलो' कहा है तो वो इसे केवल 'हाय/हैलो' ही समझती है। इसके उल्ट अगर किसी लड़की ने किसी लडके को 'हैलो' कहा तो लड़का इसको केवल 'हैलो' नहीं समझेगा।

    2. अगर लड़का 'हैलो' को केवल 'हैलो' समझना भी चाहेगा तो उसके दोस्त ऐसा नहीं होने देंगे, आख़िर दोस्त होते ही किस दिन के लिए हैं।

    3. लड़के जिनकी गर्लफ्रेंड होती है और जिनकी नहीं होती है, में केवल एक फर्क होता है, पहले वाले लोग 'लड़कियों से बात करते हैं' और दूसरे वाले 'लड़कियों के बारे में बात करते हैं'।

    4. इंजीनियरिंग कालेज छोड़ दिए जाएँ तो संसार में सुन्दर लड़कियों की कोई कमी नहीं है।

    5. जो इंजीनियरिंग कालेज जितना अच्छा होगा वहाँ लड़कियों की गुणवत्ता कालेज की रैंक के व्युत्क्रमानुपाती होगी।

    6. आपके मित्र कभी नहीं चाहते कि आपकी कोई गर्लफ्रेंड बने, वरना वो कैंटीन में किसके साथ बैठ कर मौज करेंगे।

    7. कालेज में लड़कियों के पीछे पंजीकरण बिल्कुल मुफ्त होता है, बन्दा साल में दो बार लड़की से बात नहीं करेगा लेकिन कैंटीन में हमेशा 'मेरी वाली'/'तेरी वाली' संबोधन से ही बात होगी।
  • शर्मीली बुढिया!

    एक बार एक बूढी महिला अपने घर के आँगन मैं बैठी स्वेटर बुन रही थी कि तभी अचानक एक आदमी उसकी आँख बचाते हुए उसकी कुर्सी के नीचे बम रख कर भाग गया।

    आदमी को इतनी जल्दी में भागते हुए देख, कुछ लोगों को शक हुआ तो उन्होंने आँगन में झाँक कर देखा तो उनकी नज़र बुढिया की कुर्सी के नीचे रखे बम पर पड़ी।

    यह देख कर उन लोगों ने बुढिया को आगाह करने के लिए घर के बाहर से ही चिल्लाना शुरू कर दिया "बुढिया बम है, बुढिया बम है।"

    यह शोर-गुल सुन कर बुढिया एक पल के लिए चौंकी और फिर शर्माते हुए बोली, " अरे अब वो बात कहाँ, बम तो मैं जवानी में होती थी।"
  • दोस्ती की परिभाषा!

    लोगों के बहकावे में आकर कछुए और खरगोश में फिर से पाँच मील की दौड़ लग गई!

    तीन मील की दूरी पर जा कर खरगोश ने देखा कि कछुआ बहुत दूर है और उसने सामने के ठेके से एक बोतल ली और पीना शुरू कर दिया!

    दो या तीन पैग पीने के बाद... उसने सामने से कछुए को आता हुआ देखा और बोला, "ले भाई, आज तू भी ले!"

    कछुआ भी बैठ गया और पीते-पीते बोतल खत्म हो गई!

    कछुए ने कहा: तुम मेरे इतने अच्छे दोस्त हो, और मैं तुम्हारे साथ दौड़ने की होड़ के लिए लोगों की बातों में आ गया, तुम्हारे साथ क्या हार क्या जीत? चल भाई एक हॉफ और मँगा ले!"

    फिर दोनों खुशी-खुशी घर चले गए!

    कथासार:अपने दोस्तों के साथ आख़िर किस बात की रेस! हर समय हार-जीत के पीछे ही भागते न रहें, साथ बैठिये, दो पेग लीजिए और देखिए कि ये ज़िन्दगी सच में कितनी ज़्यादा खूबसूरत है!
  • शराबी की व्यथा!

    एक बार एक शराबी रात के 12 बजे शराब की दुकान के मालिक को फ़ोन करता है और कहता है, "तेरी दुकान कब खुलेगी?"

    दुकानदार: सुबह 9 बजे।

    शराबी फिर थोड़ी देर बाद दोबारा दुकानदार को फ़ोन करके पूछता है, "तेरी दुकान कब खुलेगी?"

    दुकानदार: कहा ना सुबह 9 बजे।

    कुछ देर बाद शराबी फिर से दुकानदार को फ़ोन कर देता है और पूछता है,"भाई साहब आपकी दुकान कब खुलेगी?"

    दुकानदार: अबे तुझे कितनी बार बताऊँ सुबह 9 बजे खुलेगी इसीलिए सुबह 9 बजे आना और जो भी चाहिए हो ले जाना।

    शराबी: अबे, मैं तेरी दुकान के अन्दर से ही बोल रहा हूँ।