• कसम की कसम!

    लॉकडाउन में दो दोस्तों ने कसम खाई कि अब कभी शराब नही पियेंगे! इधर कसम खाई उधर शराब बिकनी शुरू! अब दोनों असमंजस में, करें तो क्या करें, एक ने सलाह दी कि पीने की कसम खाई है, खरीदने की तो नही!

    आखिर दोनों बोतल ले आए और घर मे आकर बैठ गए, अब लत और जोर मारने लगी तो दूसरा बोला कि भाई पीने की कसम खाई है, जाम बनाने की तो नही, अब दो पटियाला पेग बन गए, लेकिन कसम के कारण दोनो ही आगे नही बढ़े!

    अब दोनों मायूस, कसम के हाथों मजबूर, जाम को देखते बैठे रहे, समय बीतता रहा बीतता रहा, नशा बड़े बड़ों को गुलाम बना लेता है पर ये दोनों पक्के थे, कसम ली थी तो तोड़ नही सकते थे चाहे कुछ भी हो जाये! फिर पता नही क्या हुआ कि दोनों एक साथ बोले कि भाई पीने की कसम खाई है, पिलाने की तो नही!

    यह कह कर दोनों ने जाम उठाये और एक दूसरे को पिला दिए! अब आप लोग बताएं कि कसम टूटी या नही?
  • शराबी की व्यथा!

    एक बार एक शराबी रात के 12 बजे शराब की दुकान के मालिक को फ़ोन करता है और कहता है, "तेरी दुकान कब खुलेगी?"

    दुकानदार: सुबह 9 बजे।

    शराबी फिर थोड़ी देर बाद दोबारा दुकानदार को फ़ोन करके पूछता है, "तेरी दुकान कब खुलेगी?"

    दुकानदार: कहा ना सुबह 9 बजे।

    कुछ देर बाद शराबी फिर से दुकानदार को फ़ोन कर देता है और पूछता है,"भाई साहब आपकी दुकान कब खुलेगी?"

    दुकानदार: अबे तुझे कितनी बार बताऊँ सुबह 9 बजे खुलेगी इसीलिए सुबह 9 बजे आना और जो भी चाहिए हो ले जाना।

    शराबी: अबे, मैं तेरी दुकान के अन्दर से ही बोल रहा हूँ।
  • पी रहे हैं...जी रहे हैं!

    एक समय की बात है, करंटपुरा नामक कस्बे में दो दोस्त रहा करते थे। पहला जबर्दस्त पियक्कड़ और दूसरा भला इंसान। दूसरा हमेशा पहले को समझाता रहता था।

    कुछ समय बाद दूसरा दोस्त कामकाज के सिलसिले में कस्बे से शहर जा पहुंचा। कुछ समय कमाई-धमाई की, फिर वापस गांव लौटा। अपनी नई साइकिल के पैडल मारते हुए सीधे अपने दोस्त के घर पहुँचा। पहला हमेशा की तरह धुत्त मिला।

    दूसरे ने पूछा, "और क्या चल रहा है?"

    पहला बोला, "कुछ नहीं बस, पी रहे हैं.. जी रहे हैं... तुम सुनाओ।"

    दूसरा बोला, "बस, बढ़िया, शहर में कामकाज चल निकला है। साइकिल खरीद ली है, तुम साले सुधर जाओ।"

    और पैडल मारते हुए वापस शहर की तरफ निकल लिया।

    कुछ दिनों बाद फिर शहर से कस्बे में पहुंचा। इस बार स्कूटर पर था। सीधे दोस्त के घर का रास्ता लिया। वहां फिर वही क्या चल रहा है? वही पी रहे हैं, जी रहे हैं... सुधर जाओ टाइप बातें हुईं। फिर दूसरे ने स्कूटर को किक लगाई और फिर शहर की दिशा में वापस हो लिए।

    इस बार दूसरा कुछ महीनों बाद कस्बे में पहुंचा। इस बार कार में था। सीधे दोस्त के घर का रास्ता लिया। पता चला कि वो घर पर नहीं हैं, खेत गया हुआ है। तो दूसरे ने कार सीधे खेत की दिशा मे दौड़ा दी। वहां पहुंचा तो देखता क्या है कि पहला खेत के बीचों-बीच खाट पर बैठ पी रहा है। पास में ही एक हेलिकॉप्टर खड़ा है। दूसरा सीधे अपने दोस्त के पास जा पहुँचा और वही पुरानी बातचीत शुरू हो गई, "और क्या चल रहा है?"

    पहला बोला, "बस, कुछ नहीं यार, वही पी रहे हैं, जी रहे हैं... पीते-पीते बोतलें ज्यादा इकट्ठी हो गईं तो बेचकर हेलिकॉप्टर खरीद लिया और पार्किंग के लिए खेत भी खरीद लिया है, और तुम सुनाओ।"

    दूसरा वहीं बेहोश हो गया।
  • सच्चा दोस्त कौन?

    रसोई में गैस पर कूकर चढ़ाया... सेल्फी वाली पोस्ट डाली और लिखा,

    "बीवी मायके गयी है और मुझे चाय बनानी है, कुकर में कितनी सीटी लगाऊँ?"

    दोस्तों के कमेंट्स आये:

    पहला दोस्त: कुकर में पहले ही एक सीटी लगी है, और कितनी लगाएगा?

    दूसरा दोस्त: बेवकूफ चाय कुकर में थोड़ी बनती है, कड़ाही चढा!

    तीसरा दोस्त: पहले दो घण्टे चाय पत्ती भिगो ले... दो तीन सीटी में काम चल जाएगा!

    चौथा दोस्त: खिड़की पर जाके एक सीटी बजा,  पड़ोसन चाय दे जाएगी!

    सबसे उत्तम कमेंट:

    अबे गधे, बीवी मायके गई है तो चाय क्यों पी रहा है? बेवकूफ बोतल पी और मौज कर, साथ हमें भी बुला, सीटी हम बजा देंगे।