• मोहब्बत आप ही मंज़िल है अपनी;<br/>
न जाने हुस्न क्यों इतरा रहा है!
    मोहब्बत आप ही मंज़िल है अपनी;
    न जाने हुस्न क्यों इतरा रहा है!
    ~ Mazhar Imam
  • हमारी मुस्कुराहट पर न जाना;<br/>
दिया तो क़ब्र पर भी जल रहा है!
    हमारी मुस्कुराहट पर न जाना;
    दिया तो क़ब्र पर भी जल रहा है!
    ~ Aanis Moin
  • ये पानी ख़ामोशी से बह रहा है;<br/>
इसे देखें कि इस में डूब जाएँ!
    ये पानी ख़ामोशी से बह रहा है;
    इसे देखें कि इस में डूब जाएँ!
    ~ Ahmad Mushtaq
  • सब कुछ तो है क्या ढूँडती रहती हैं निगाहें;</br>
क्या बात है मैं वक़्त पे घर क्यों नहीं जाता!
    सब कुछ तो है क्या ढूँडती रहती हैं निगाहें;
    क्या बात है मैं वक़्त पे घर क्यों नहीं जाता!
    ~ Nida Fazli
  • अपने होने का कुछ एहसास न होने से हुआ;</br>
ख़ुद से मिलना मेरा एक शख़्स के खोने से हुआ!
    अपने होने का कुछ एहसास न होने से हुआ;
    ख़ुद से मिलना मेरा एक शख़्स के खोने से हुआ!
    ~ Musavvir Sabzwari
  • दूर तक फैला हुआ पानी ही पानी हर तरफ़;</br>
अब के बादल ने बहुत की मेहरबानी हर तरफ़!
    दूर तक फैला हुआ पानी ही पानी हर तरफ़;
    अब के बादल ने बहुत की मेहरबानी हर तरफ़!
    ~ Shabab Lalit
  • एक हसीन आँख के इशारे पर;</br>
क़ाफ़िले राह भूल जाते हैं!
    एक हसीन आँख के इशारे पर;
    क़ाफ़िले राह भूल जाते हैं!
    ~ Abdul Hameed Adam
  • और इस से पहले कि साबित हो जुर्म-ए-ख़ामोशी;</br>
हम अपनी राय का इज़हार करना चाहते हैं!
    और इस से पहले कि साबित हो जुर्म-ए-ख़ामोशी;
    हम अपनी राय का इज़हार करना चाहते हैं!
    ~ Saleem Kausar
  • कभी मेरी तलब कच्चे घड़े पर पार उतरती है;</br>
कभी महफ़ूज़ कश्ती में सफ़र करने से डरता हूँ!
    कभी मेरी तलब कच्चे घड़े पर पार उतरती है;
    कभी महफ़ूज़ कश्ती में सफ़र करने से डरता हूँ!
  • दिल की तकलीफ़ कम नहीं करते;
अब कोई शिकवा हम नहीं करते!
    दिल की तकलीफ़ कम नहीं करते; अब कोई शिकवा हम नहीं करते!
    ~ Jaun Elia