• होश में आऊँ तो सोचूँ अभी देखा क्या है; <br/>
फिर ये पूछूँ कि ये पर्दा है तो जल्वा क्या है!
    होश में आऊँ तो सोचूँ अभी देखा क्या है;
    फिर ये पूछूँ कि ये पर्दा है तो जल्वा क्या है!
    ~ Ehsan Akbar
  • लफ़्ज़ का बस है तअ'ल्लुक़ मेरे तेरे दरमियाँ; <br/>
लफ़्ज़ के मअनी पे क़ाएम सारे रिश्तों का निशाँ!
    लफ़्ज़ का बस है तअ'ल्लुक़ मेरे तेरे दरमियाँ;
    लफ़्ज़ के मअनी पे क़ाएम सारे रिश्तों का निशाँ!
    ~ Faheem Aazmi
  • सर किया ज़ुल्फ़ की शब को तो सहर तक पहुँचे; <br/>
वर्ना हम लोग कहाँ हुस्न-ए-नज़र तक पहुँचे!
    सर किया ज़ुल्फ़ की शब को तो सहर तक पहुँचे;
    वर्ना हम लोग कहाँ हुस्न-ए-नज़र तक पहुँचे!
    ~ Gaffar Babar
  • चाँदनी-रात में अंधेरा था; <br/>
इस तरह बेबसी ने घेरा था!
    चाँदनी-रात में अंधेरा था;
    इस तरह बेबसी ने घेरा था!
    ~ A G Josh
  • जाने फिर तुम से मुलाक़ात कभी हो कि न हो; <br/>
खुल के दुख-दर्द की कुछ बात कभी हो कि न हो!
    जाने फिर तुम से मुलाक़ात कभी हो कि न हो;
    खुल के दुख-दर्द की कुछ बात कभी हो कि न हो!
    ~ B S Jain Jauhar
  • जो दिल पर बोझ है यारब ज़रा भी कम नहीं होता; <br/>
ज़माना ग़म तो देता है शरीक-ए-ग़म नहीं होता!
    जो दिल पर बोझ है यारब ज़रा भी कम नहीं होता;
    ज़माना ग़म तो देता है शरीक-ए-ग़म नहीं होता!
    ~ Chaman Bhatnagar
  • क्या-क्या नहीं किया मैंने तेरी एक मुस्कान के लिए;br/>
फिर भी अकेला छोड़ दिया उस अनजान के लिए!
    क्या-क्या नहीं किया मैंने तेरी एक मुस्कान के लिए;br/> फिर भी अकेला छोड़ दिया उस अनजान के लिए!
  • मेरी उदासी मुझसे रोज़ मिलने आती हैं;<br/>
मुस्कुराकर हर बार उसे रूखसत कर देता हूँ!
    मेरी उदासी मुझसे रोज़ मिलने आती हैं;
    मुस्कुराकर हर बार उसे रूखसत कर देता हूँ!
  • तू इश्क की दूसरी निशानी दे दे मुझको;br/>
आँसू तो रोज गिर कर सूख जाते हैं!
    तू इश्क की दूसरी निशानी दे दे मुझको;br/> आँसू तो रोज गिर कर सूख जाते हैं!
  • बड़े पक्के हैं तेरे एहसास के धागे;<br/>
बिना बाँधे भी बंधे रहते हैं!
    बड़े पक्के हैं तेरे एहसास के धागे;
    बिना बाँधे भी बंधे रहते हैं!