• इंसान जितना भी ऑनलाइन होता जा रहा है, इंसानियत उतनी ही ऑफलाइन होती जा रही है!
    इंसान जितना भी ऑनलाइन होता जा रहा है, इंसानियत उतनी ही ऑफलाइन होती जा रही है!
  • `लगन` व्यक्ति से वो करवा लेती है, जो वह नहीं कर सकता!<br/>
`साहस' व्यक्ति से वो करवाता है, जो वह कर सकता है!<br/>
किन्तु `अनुभव` व्यक्ति से वही करवाता है, जो वास्तव में उसे करना चाहिये!
    "लगन" व्यक्ति से वो करवा लेती है, जो वह नहीं कर सकता!
    "साहस' व्यक्ति से वो करवाता है, जो वह कर सकता है!
    किन्तु "अनुभव" व्यक्ति से वही करवाता है, जो वास्तव में उसे करना चाहिये!
  • जिसका भी साथ दो, खुल के दो;</br>
विरोधी कहलाओगे, गद्दार नहीं!
    जिसका भी साथ दो, खुल के दो;
    विरोधी कहलाओगे, गद्दार नहीं!
  • मेहनत अगर आदत बन जाये तो कामयाबी मुकद्दर बन जाती है!
    मेहनत अगर आदत बन जाये तो कामयाबी मुकद्दर बन जाती है!
  • कर्मों का बही खाता भी दुरस्त रखिये जनाब; एक दिन इसका भी मार्च आएगा;</br>
लेकिन फिर अप्रैल नहीं आयेगा!
    कर्मों का बही खाता भी दुरस्त रखिये जनाब; एक दिन इसका भी मार्च आएगा;
    लेकिन फिर अप्रैल नहीं आयेगा!
  • किसी भी क्लास में नहीं पढ़ाया जाता कि हमें कैसे बोलना चाहिए!</br>
लेकिन जैसे हम बोलते हैं वहीँ से पता चल जाता है कि हम किस क्लास के हैं!
    किसी भी क्लास में नहीं पढ़ाया जाता कि हमें कैसे बोलना चाहिए!
    लेकिन जैसे हम बोलते हैं वहीँ से पता चल जाता है कि हम किस क्लास के हैं!
  • सब कुछ महंगा हो गया लेकिन माचिस आज भी एक रूपये पर रुकी हुई है!</br>
क्योंकि आग लगाने वाले की कभी कीमत नहीं बढ़ती!
    सब कुछ महंगा हो गया लेकिन माचिस आज भी एक रूपये पर रुकी हुई है!
    क्योंकि आग लगाने वाले की कभी कीमत नहीं बढ़ती!
  • संस्कार इसलिए भी कम हो गए हैं बच्चों में...</br>
क्योंकि पहले बुजुर्गों से सीखते थे, अब गूगल से सीखते हैं!
    संस्कार इसलिए भी कम हो गए हैं बच्चों में...
    क्योंकि पहले बुजुर्गों से सीखते थे, अब गूगल से सीखते हैं!
  • दबदबा, हुकूमत, नशा और दौलत;</br>
ये सब किरायेदार हैं, घर बदलते रहते हैं!
    दबदबा, हुकूमत, नशा और दौलत;
    ये सब किरायेदार हैं, घर बदलते रहते हैं!
  • बिना किताबों के जो पढाई सीखी जाती है, उसे ज़िन्दगी कहते हैं!
    बिना किताबों के जो पढाई सीखी जाती है, उसे ज़िन्दगी कहते हैं!