• गुलों में रंग भरे बाद-ए-नौ-बहार चले,</br>
चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले;</br>
क़फ़स उदास है यारो सबा से कुछ तो कहो,</br>
कहीं तो बहर-ए-ख़ुदा आज ज़िक्र-ए-यार चले!</br></br>
*बहर-ए-ख़ुदा: ईश्वर के लिए</br>
*क़फ़स: पिंजरा, क़ैदख़ाना</br>
*सबा: हवा, सुबह की हवा
    गुलों में रंग भरे बाद-ए-नौ-बहार चले,
    चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले;
    क़फ़स उदास है यारो सबा से कुछ तो कहो,
    कहीं तो बहर-ए-ख़ुदा आज ज़िक्र-ए-यार चले!

    *बहर-ए-ख़ुदा: ईश्वर के लिए
    *क़फ़स: पिंजरा, क़ैदख़ाना
    *सबा: हवा, सुबह की हवा
    ~ Faiz Ahmad Faiz
  • आप की याद आती रही रात भर;</br>
चाँदनी दिल दुखाती रही रात भर!
    आप की याद आती रही रात भर;
    चाँदनी दिल दुखाती रही रात भर!
    ~ Faiz Ahmad Faiz
  • तेज़ है आज दर्द-ए-दिल साक़ी;</br>
तल्ख़ी-ए-मय को तेज़-तर कर दे!</br></br>

* तल्ख़ी-ए-मय:  bitterness of the wine
    तेज़ है आज दर्द-ए-दिल साक़ी;
    तल्ख़ी-ए-मय को तेज़-तर कर दे!

    * तल्ख़ी-ए-मय: bitterness of the wine
    ~ Faiz Ahmad Faiz
  • जब तुझे याद कर लिया सुबह महक महक उठी;</br>
जब तेरा ग़म जगा लिया रात मचल मचल गयी!
    जब तुझे याद कर लिया सुबह महक महक उठी;
    जब तेरा ग़म जगा लिया रात मचल मचल गयी!
    ~ Faiz Ahmad Faiz
  • कर रहा था ग़म-ए-जहाँ का हिसाब;<br/>
आज तुम याद बे-हिसाब आए!
    कर रहा था ग़म-ए-जहाँ का हिसाब;
    आज तुम याद बे-हिसाब आए!
    ~ Faiz Ahmad Faiz
  • दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के;<br/>

वो जा रहा है कोई शब-ए-ग़म गुज़ार के!<br/><br/>

* शब-ए-ग़म -  ग़म/दुख की रात
    दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के;
    वो जा रहा है कोई शब-ए-ग़म गुज़ार के!

    * शब-ए-ग़म - ग़म/दुख की रात
    ~ Faiz Ahmad Faiz
  • आए कुछ अब्र कुछ शराब आए;<br/>
इस के बा'द आए जो अज़ाब आए!<br/><br/>
*अब्र- मेघ, बादल
    आए कुछ अब्र कुछ शराब आए;
    इस के बा'द आए जो अज़ाब आए!

    *अब्र- मेघ, बादल
    ~ Faiz Ahmad Faiz
  • शाम-ए-फ़िराक़ अब न पूछ आई और आ के टल गई:

    शाम-ए-फ़िराक़ अब न पूछ आई और आ के टल गई,
    दिल था कि फिर बहल गया जाँ थी कि फिर सँभल गई;

    बज़्म-ए-ख़याल में तेरे हुस्न की शमा जल गई,
    दर्द का चाँद बुझ गया हिज्र की रात ढल गई;

    जब तुझे याद कर लिया सुब्ह महक महक उठी,
    जब तेरा ग़म जगा लिया रात मचल मचल गई;

    दिल से तो हर मुआमला कर के चले थे साफ़ हम,
    कहने में उन के सामने बात बदल बदल गई;

    आख़िर-ए-शब के हम-सफ़र 'फ़ैज़' न जाने क्या हुए,
    रह गई किस जगह सबा सुब्ह किधर निकल गई!
    ~ Faiz Ahmad Faiz
  • और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा; <br/>
राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा! x
    और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा;
    राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा! x
    ~ Faiz Ahmad Faiz
  • दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है;<br/>
लम्बी है गम की शाम मगर शाम ही तो है!
    दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है;
    लम्बी है गम की शाम मगर शाम ही तो है!
    ~ Faiz Ahmad Faiz