• मरते हैं आरज़ू में मरने की;</br>
मौत आती है पर नहीं आती!
    मरते हैं आरज़ू में मरने की;
    मौत आती है पर नहीं आती!
    ~ Mirza Ghalib
  • मेरी क़िस्मत में ग़म अगर इतना था;</br>
दिल भी या-रब कई दिए होते!
    मेरी क़िस्मत में ग़म अगर इतना था;
    दिल भी या-रब कई दिए होते!
    ~ Mirza Ghalib
  • इश्क़ मुझ को नहीं वहशत ही सही;<br/>
मेरी वहशत तेरी शोहरत ही सही!
    इश्क़ मुझ को नहीं वहशत ही सही;
    मेरी वहशत तेरी शोहरत ही सही!
    ~ Mirza Ghalib
  • हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद;<br/>
जो नहीं जानते वफ़ा क्या है!
    हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद;
    जो नहीं जानते वफ़ा क्या है!
    ~ Mirza Ghalib
  • इस सादगी पे कौन न मर जाए ऐ ख़ुदा;<br/>
लड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नहीं!
    इस सादगी पे कौन न मर जाए ऐ ख़ुदा;
    लड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नहीं!
    ~ Mirza Ghalib
  • आता है दाग-ए-हसरत-ए-दिल का शुमार याद,<br/>
मुझसे मेरे गुनाह का हिसाब ऐ खुदा न माँग।
    आता है दाग-ए-हसरत-ए-दिल का शुमार याद,
    मुझसे मेरे गुनाह का हिसाब ऐ खुदा न माँग।
    ~ Mirza Ghalib
  • हज़ारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले;<br/>बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले!
    हज़ारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले;
    बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले!
    ~ Mirza Ghalib
  • गुनाह करके कहां जाओगे गालिब;<br/>
ये जमीन और आसमान सब उसी का है!
    गुनाह करके कहां जाओगे गालिब;
    ये जमीन और आसमान सब उसी का है!
    ~ Mirza Ghalib
  • मैं नादान था जो वफ़ा को तलाश करता रहा ग़ालिब;<br/>
यह न सोचा के एक दिन अपनी साँस भी बेवफा हो जाएगी!
    मैं नादान था जो वफ़ा को तलाश करता रहा ग़ालिब;
    यह न सोचा के एक दिन अपनी साँस भी बेवफा हो जाएगी!
    ~ Mirza Ghalib
  • फिर तेरे कूचे को जाता है ख्याल,<br/>
दिल-ऐ-ग़म गुस्ताख़ मगर याद आया;<br/> 
कोई वीरानी सी वीरानी है,<br/>
दश्त को देख के घर याद आया!
    फिर तेरे कूचे को जाता है ख्याल,
    दिल-ऐ-ग़म गुस्ताख़ मगर याद आया;
    कोई वीरानी सी वीरानी है,
    दश्त को देख के घर याद आया!
    ~ Mirza Ghalib