• यूँ लगे दोस्त तेरा मुझ से ख़फ़ा हो जाना;</br>
जिस तरह फूल से ख़ुशबू का जुदा हो जाना!
    यूँ लगे दोस्त तेरा मुझ से ख़फ़ा हो जाना;
    जिस तरह फूल से ख़ुशबू का जुदा हो जाना!
    ~ Qateel Shifai
  • परेशाँ रात सारी है सितारो तुम तो सो जाओ,</br>
सुकूत-ए-मर्ग तारी है सितारो तुम तो सो जाओ;</br>
हँसो और हँसते हँसते डूबते जाओ ख़लाओं में,</br>
हमीं पे रात भारी है सितारो तुम तो सो जाओ!</br></br>
*सुकूत-ए-मर्ग: मौत की चुप्पी</br>
*ख़लाओं: आकाश
    परेशाँ रात सारी है सितारो तुम तो सो जाओ,
    सुकूत-ए-मर्ग तारी है सितारो तुम तो सो जाओ;
    हँसो और हँसते हँसते डूबते जाओ ख़लाओं में,
    हमीं पे रात भारी है सितारो तुम तो सो जाओ!

    *सुकूत-ए-मर्ग: मौत की चुप्पी
    *ख़लाओं: आकाश
    ~ Qateel Shifai
  • शमा जिस आग में जलती है नुमाइश के लिए;</br>
हम उसी आग में गुम-नाम से जल जाते हैं!</br></br>
*शमा: मोमबत्ती
    शमा जिस आग में जलती है नुमाइश के लिए;
    हम उसी आग में गुम-नाम से जल जाते हैं!

    *शमा: मोमबत्ती
    ~ Qateel Shifai
  • दूर तक छाए थे बादल और कहीं साया न था;</br>
इस तरह बरसात का मौसम कभी आया न था!
    दूर तक छाए थे बादल और कहीं साया न था;
    इस तरह बरसात का मौसम कभी आया न था!
    ~ Qateel Shifai
  • उफ्फ वो मरमर से तराशा हुआ शफ़्फ़ाफ़ बदन;</br>
देखने वाले उसे ताज-महल कहते हैं!</br></br>
* शफ़्फ़ाफ़: निर्मल
    उफ्फ वो मरमर से तराशा हुआ शफ़्फ़ाफ़ बदन;
    देखने वाले उसे ताज-महल कहते हैं!

    * शफ़्फ़ाफ़: निर्मल
    ~ Qateel Shifai
  • हालात से ख़ौफ़ खा रहा हूँ;<br/>
शीशे के महल बना रहा हूँ!
    हालात से ख़ौफ़ खा रहा हूँ;
    शीशे के महल बना रहा हूँ!
    ~ Qateel Shifai
  • हमें भी नींद आ जाएगी हम भी सो ही जाएँगे;<br/>
अभी कुछ बे-क़रारी है सितारो तुम तो सो जाओ!
    हमें भी नींद आ जाएगी हम भी सो ही जाएँगे;
    अभी कुछ बे-क़रारी है सितारो तुम तो सो जाओ!
    ~ Qateel Shifai
  • क्या मस्लहत-शनास था वो आदमी 'क़तील'; <br/>
मजबूरियों का जिस ने वफ़ा नाम रख दिया!
    क्या मस्लहत-शनास था वो आदमी 'क़तील';
    मजबूरियों का जिस ने वफ़ा नाम रख दिया!
    ~ Qateel Shifai
  • आखिरी हिचकी तिरे ज़ानू पे आये;<br/>
मौत भी मैं शायराना चाहता हूँ!
    आखिरी हिचकी तिरे ज़ानू पे आये;
    मौत भी मैं शायराना चाहता हूँ!
    ~ Qateel Shifai
  • सारी बस्ती में ये जादू नज़र आए मुझको:

    सारी बस्ती में ये जादू नज़र आए मुझको,
    जो दरीचा भी खुले तू नज़र आए मुझको;

    सदियों का रत जगा मेरी रातों में आ गया,
    मैं एक हसीन शख्स की बातों में आ गया;

    जब तस्सवुर मेरा चुपके से तुझे छू आए,
    देर तक अपने बदन से तेरी खुशबू आए;

    गुस्ताख हवाओं की शिकायत न किया कर,
    उड़ जाए दुपट्टा तो खनक औढ लिया कर;

    तुम पूछो और में न बताउ ऐसे तो हालात नहीं,
    एक ज़रा सा दिल टूटा है और तो कोई बात नहीं;

    रात के सन्नाटे में हमने क्या-क्या धोके खाए है,
    अपना ही जब दिल धड़का तो हम समझे वो आए है!
    ~ Qateel Shifai