• किस दर्जा दिल-शिकन थे मोहब्बत के हादसे;</br>
हम ज़िंदगी में फिर कोई अरमाँ न कर सके!
    किस दर्जा दिल-शिकन थे मोहब्बत के हादसे;
    हम ज़िंदगी में फिर कोई अरमाँ न कर सके!
    ~ Sahir Ludhianvi
  • इस तरफ़ से गुज़रे थे क़ाफ़िले बहारों के;</br>
आज तक सुलगते हैं ज़ख़्म रहगुज़ारों के!
    इस तरफ़ से गुज़रे थे क़ाफ़िले बहारों के;
    आज तक सुलगते हैं ज़ख़्म रहगुज़ारों के!
    ~ Sahir Ludhianvi
  • यूँ ही दिल ने चाहा था रोना-रुलाना;</br>
तेरी याद तो बन गई एक बहाना!
    यूँ ही दिल ने चाहा था रोना-रुलाना;
    तेरी याद तो बन गई एक बहाना!
    ~ Sahir Ludhianvi
  • हज़ार बर्क़ गिरे लाख आँधियाँ उठें;<br/>
वो फूल खिल के रहेंगे जो खिलने वाले हैं!<br/><br/>

*बर्क: बिजली
    हज़ार बर्क़ गिरे लाख आँधियाँ उठें;
    वो फूल खिल के रहेंगे जो खिलने वाले हैं!

    *बर्क: बिजली
    ~ Sahir Ludhianvi
  • उन का ग़म उन का तसव्वुर उन के शिकवे अब कहाँ;<br/>
अब तो ये बातें भी ऐ दिल हो गयी आई गई!
    उन का ग़म उन का तसव्वुर उन के शिकवे अब कहाँ;
    अब तो ये बातें भी ऐ दिल हो गयी आई गई!
    ~ Sahir Ludhianvi
  • हम ग़म-ज़दा हैं लाएँ कहाँ से ख़ुशी के गीत;<br/>
देंगे वही जो पाएँगे इस ज़िंदगी से हम!
    हम ग़म-ज़दा हैं लाएँ कहाँ से ख़ुशी के गीत;
    देंगे वही जो पाएँगे इस ज़िंदगी से हम!
    ~ Sahir Ludhianvi
  • हम तो समझे थे कि हम भूल गए हैं उन को; <br/>
क्या हुआ आज ये किस बात पे रोना आया!
    हम तो समझे थे कि हम भूल गए हैं उन को;
    क्या हुआ आज ये किस बात पे रोना आया!
    ~ Sahir Ludhianvi
  • तंग आ चुके हैं कशमकश-ए-ज़िंदगी से हम; <br/>
ठुकरा न दें जहाँ को कहीं बे-दिली से हम!
    तंग आ चुके हैं कशमकश-ए-ज़िंदगी से हम;
    ठुकरा न दें जहाँ को कहीं बे-दिली से हम!
    ~ Sahir Ludhianvi
  • आप दौलत के तराज़ू में दिलों को तौलें;<br/>
हम मोहब्बत से मोहब्बत का सिला देते हैं!
    आप दौलत के तराज़ू में दिलों को तौलें;
    हम मोहब्बत से मोहब्बत का सिला देते हैं!
    ~ Sahir Ludhianvi
  • हमारे अहद की तहज़ीब में क़बा ही नहीं;<br/>
अगर क़बा हो तो बंद-ए-क़बा की बात करें!<br/><br/>
तहज़ीब: सभ्यता<br/>
क़बा: गाउन, चोंगा<br/>
बंद-ए-क़बा: कपड़े की गाँठ
    हमारे अहद की तहज़ीब में क़बा ही नहीं;
    अगर क़बा हो तो बंद-ए-क़बा की बात करें!

    तहज़ीब: सभ्यता
    क़बा: गाउन, चोंगा
    बंद-ए-क़बा: कपड़े की गाँठ
    ~ Sahir Ludhianvi