• अब ज़िंदगी का कोई सहारा नहीं रहा;<br/>
सब ग़ैर हैं कोई भी हमारा नहीं रहा!
    अब ज़िंदगी का कोई सहारा नहीं रहा;
    सब ग़ैर हैं कोई भी हमारा नहीं रहा!
    ~ Ghazal Ansari
  • लोग कहते हैं कि क़ातिल को मसीहा कहिए;<br/>
कैसे मुमकिन है अंधेरों को उजाला कहिए!
    लोग कहते हैं कि क़ातिल को मसीहा कहिए;
    कैसे मुमकिन है अंधेरों को उजाला कहिए!
    ~ Faiz Ul Hasan Khayal
  • तपती ज़मीं पे पाँव न धर अब भी लौट जा;<br/>
क्यों हो रहा है ख़ाक-ब-सर अब भी लौट जा!
    तपती ज़मीं पे पाँव न धर अब भी लौट जा;
    क्यों हो रहा है ख़ाक-ब-सर अब भी लौट जा!
    ~ Ejaz Rahi
  • मैं हूँ हैरान ये सिलसिला क्या है;<br/>
आइना मुझ में ढूँढता क्या है!
    मैं हूँ हैरान ये सिलसिला क्या है;
    आइना मुझ में ढूँढता क्या है!
    ~ Aas Fatmi
  • मजबूरियों के नाम पे सब छोड़ना पड़ा;<br/>
दिल तोड़ना कठिन था मगर तोड़ना पड़ा!
    मजबूरियों के नाम पे सब छोड़ना पड़ा;
    दिल तोड़ना कठिन था मगर तोड़ना पड़ा!
    ~ Anjum Rahbar
  • हमारी जान तुम ऐसा करोगी;<br/>
हमारी जान का सौदा करोगी!
    हमारी जान तुम ऐसा करोगी;
    हमारी जान का सौदा करोगी!
    ~ Deepak Sharma Deep
  • रफ़्ता रफ़्ता चीख़ना आराम हो जाने के बाद;<br/>
डूब जाना फिर निकलना शाम हो जाने के बाद!
    रफ़्ता रफ़्ता चीख़ना आराम हो जाने के बाद;
    डूब जाना फिर निकलना शाम हो जाने के बाद!
    ~ Parnav Mishra Tejas
  • कोई कैसा ही साबित हो तबीयत आ ही जाती है;<br/>
ख़ुदा जाने ये क्या आफ़त है आफ़त आ ही जाती है!<br/><br/>
*तबीयत: स्वभाव
    कोई कैसा ही साबित हो तबीयत आ ही जाती है;
    ख़ुदा जाने ये क्या आफ़त है आफ़त आ ही जाती है!

    *तबीयत: स्वभाव
    ~ Qalaq Merathi
  • अपनी पलकों से जो टूटे हैं गुहर देखते हैं;<br/>
हम दुआ माँगते हैं और असर देखते हैं!<br/><br/>
*गुहर: मोती
    अपनी पलकों से जो टूटे हैं गुहर देखते हैं;
    हम दुआ माँगते हैं और असर देखते हैं!

    *गुहर: मोती
    ~ Mah Talat Zahidi
  • पर्दा तुम्हारे रुख़ से हटाना पड़ा मुझे;<br/>
यूँ अपनी हसरतों को जगाना पड़ा मुझे!
    पर्दा तुम्हारे रुख़ से हटाना पड़ा मुझे;
    यूँ अपनी हसरतों को जगाना पड़ा मुझे!
    ~ Faisal Imtiyaz Khan