• बदन में जैसे लहू ताज़ियाना हो गया है;</br>
उसे गले से लगाए ज़माना हो गया है!
    बदन में जैसे लहू ताज़ियाना हो गया है;
    उसे गले से लगाए ज़माना हो गया है!
    ~ Irfan Siddiqi
  • तेरा दीदार हो हसरत बहुत है;</br>
चलो कि नींद भी आने लगी है!
    तेरा दीदार हो हसरत बहुत है;
    चलो कि नींद भी आने लगी है!
    ~ Sajid Premi
  • आज भी शायद कोई फूलों का तोहफ़ा भेज दे;</br>
तितलियाँ मंडरा रही हैं काँच के गुल-दान पर!
    आज भी शायद कोई फूलों का तोहफ़ा भेज दे;
    तितलियाँ मंडरा रही हैं काँच के गुल-दान पर!
    ~ Shakeb Jalali
  • ग़म-ए-ज़माना ने मजबूर कर दिया वर्ना;</br>
ये आरज़ू थी कि बस तेरी आरज़ू करते!
    ग़म-ए-ज़माना ने मजबूर कर दिया वर्ना;
    ये आरज़ू थी कि बस तेरी आरज़ू करते!
    ~ Akhtar Sheerani
  • लहजा कि जैसे सुब्ह की ख़ुश्बू अज़ान दे;</br>
जी चाहता है मैं तेरी आवाज़ चूम लूँ!
    लहजा कि जैसे सुब्ह की ख़ुश्बू अज़ान दे;
    जी चाहता है मैं तेरी आवाज़ चूम लूँ!
    ~ Bashir Badr
  • तुम अपने चाँद तारे कहकशाँ चाहे जिसे देना;</br>
मेरी आँखों पे अपनी दीद की इक शाम लिख देना!
    तुम अपने चाँद तारे कहकशाँ चाहे जिसे देना;
    मेरी आँखों पे अपनी दीद की इक शाम लिख देना!
  • ख़्वाब ही ख़्वाब कब तलक देखूँ;</br>
काश तुझ को भी इक झलक देखूँ!
    ख़्वाब ही ख़्वाब कब तलक देखूँ;
    काश तुझ को भी इक झलक देखूँ!
    ~ Obaidullah Aleem
  • दिल में वो भीड़ है कि ज़रा भी नहीं जगह;</br>
आप आइए मगर कोई अरमाँ निकाल के!
    दिल में वो भीड़ है कि ज़रा भी नहीं जगह;
    आप आइए मगर कोई अरमाँ निकाल के!
    ~ Jaleel Manikpuri
  • अंधेरा है कैसे तेरा ख़त पढ़ूँ;</br>
लिफ़ाफ़े में कुछ रौशनी भेज दे!
    अंधेरा है कैसे तेरा ख़त पढ़ूँ;
    लिफ़ाफ़े में कुछ रौशनी भेज दे!
    ~ Mohammed Alvi
  • इस भरोसे पे कर रहा हूँ गुनाह;</br>
बख़्श देना तो तेरी फ़ितरत है!
    इस भरोसे पे कर रहा हूँ गुनाह;
    बख़्श देना तो तेरी फ़ितरत है!
    ~ Author Unknown