• मुझे ये डर है दिल-ए-ज़िंदा तू न मर जाए;</br>
कि ज़िंदगानी इबारत है तेरे जीने से!</br></br>
*इबारत: प्रतीक
    मुझे ये डर है दिल-ए-ज़िंदा तू न मर जाए;
    कि ज़िंदगानी इबारत है तेरे जीने से!

    *इबारत: प्रतीक
    ~ Khwaja Mir Dard
  • झूठ वाले कहीं से कहीं बढ़ गए;</br>
और मैं था कि सच बोलता रह गया!
    झूठ वाले कहीं से कहीं बढ़ गए;
    और मैं था कि सच बोलता रह गया!
    ~ Wasim Barelvi
  • उड़ने दो परिंदों को अभी शोख़ हवा में;</br>
फिर लौट के बचपन के ज़माने नहीं आते!
    उड़ने दो परिंदों को अभी शोख़ हवा में;
    फिर लौट के बचपन के ज़माने नहीं आते!
    ~ Bashir Badr
  • जो दिल को है ख़बर कहीं मिलती नहीं ख़बर;</br>
हर सुब्ह एक अज़ाब है अख़बार देखना!
    जो दिल को है ख़बर कहीं मिलती नहीं ख़बर;
    हर सुब्ह एक अज़ाब है अख़बार देखना!
    ~ Obaidullah Aleem
  • उम्र जो बे-ख़ुदी में गुज़री है;</br>
बस वही आगही में गुज़री है!</br></br>
*आगही: समझ-बूझ
    उम्र जो बे-ख़ुदी में गुज़री है;
    बस वही आगही में गुज़री है!

    *आगही: समझ-बूझ
    ~ Gulzar Dehlvi
  • जवाज़ कोई अगर मेरी बंदगी का नहीं;</br>
मैं पूछता हूँ तुझे क्या मिला ख़ुदा हो कर!</br></br>
* जवाज़: जाइज़ होना
    जवाज़ कोई अगर मेरी बंदगी का नहीं;
    मैं पूछता हूँ तुझे क्या मिला ख़ुदा हो कर!

    * जवाज़: जाइज़ होना
    ~ Shehzad Ahmed
  • पेड़ के काटने वालों को ये मालूम तो था;</br>
जिस्म जल जाएँगे जब सर पे न साया होगा!
    पेड़ के काटने वालों को ये मालूम तो था;
    जिस्म जल जाएँगे जब सर पे न साया होगा!
    ~ Kaifi Azmi
  • कम से कम मौत से ऐसी मुझे उम्मीद नहीं;
ज़िंदगी तूने तो धोखे पे दिया है धोखा!
    कम से कम मौत से ऐसी मुझे उम्मीद नहीं; ज़िंदगी तूने तो धोखे पे दिया है धोखा!
    ~ Firaq Gorakhpuri
  • कोई ख़ामोश ज़ख़्म लगती है;</br>
ज़िंदगी एक नज़्म लगती है!</br></br>
*नज़्म: कविता
    कोई ख़ामोश ज़ख़्म लगती है;
    ज़िंदगी एक नज़्म लगती है!

    *नज़्म: कविता
    ~ Gulzar
  • ज़िंदगी एक फ़न है लम्हों को;</br>
अपने अंदाज़ से गँवाने का!</br></br>
*फ़न:  कला
    ज़िंदगी एक फ़न है लम्हों को;
    अपने अंदाज़ से गँवाने का!

    *फ़न: कला
    ~ Jaun Elia