• ना मेरी ज़ख़्म पर रखो मरहम;<br/>
मेरे क़ातिल की ये निशानी है!
    ना मेरी ज़ख़्म पर रखो मरहम;
    मेरे क़ातिल की ये निशानी है!
    ~ Goya Faqir Mohammad
  • कभी दुआ तो कभी बद-दुआ से लड़ते हुए;<br/>
तमाम उम्र गुज़ारी हवा से लड़ते हुए!
    कभी दुआ तो कभी बद-दुआ से लड़ते हुए;
    तमाम उम्र गुज़ारी हवा से लड़ते हुए!
    ~ Zafar Moradabadi
  • हवा से उजड़ कर बिखर क्यों गए;<br/>
वो पत्ते जो सरसब्ज़ शाख़ों पे थे!<br/>
*सरसब्ज़ - उत्पादक
    हवा से उजड़ कर बिखर क्यों गए;
    वो पत्ते जो सरसब्ज़ शाख़ों पे थे!
    *सरसब्ज़ - उत्पादक
    ~ Parkash Fikri
  • दर्द अब दिल की दवा हो जैसे;<br/>
ज़िंदगी एक सज़ा हो जैसे!
    दर्द अब दिल की दवा हो जैसे;
    ज़िंदगी एक सज़ा हो जैसे!
    ~ Iftikhar Aazmi
  • कितना दुश्वार है जज़्बों की तिजारत करना;<br/>
एक ही शख़्स से दो बार मोहब्बत करना!<br/>
*दुश्वार-कठिन
    कितना दुश्वार है जज़्बों की तिजारत करना;
    एक ही शख़्स से दो बार मोहब्बत करना!
    *दुश्वार-कठिन
    ~ Liaqat Jafri
  • मैं बाज़गश्त-ए-दिल हूँ पैहम शिकस्त-ए-दिल हूँ;<br/>
वो आज़मा रहा हूँ जो आज़मा चुका हूँ!
    मैं बाज़गश्त-ए-दिल हूँ पैहम शिकस्त-ए-दिल हूँ;
    वो आज़मा रहा हूँ जो आज़मा चुका हूँ!
    ~ Saba Akhtar
  • मेरी दुआओं की सब नग़्मगी तमाम हुई;<br/>
सहर तो हो न सकी और फिर से शाम हुई!<br/><br/>

* नग़्मगी - गीतकारी
    मेरी दुआओं की सब नग़्मगी तमाम हुई;
    सहर तो हो न सकी और फिर से शाम हुई!

    * नग़्मगी - गीतकारी
    ~ Yaqoob Yawar
  • खिड़की से महताब न देखो;<br/>
ऐसे भी तुम ख़्वाब न देखो!
    खिड़की से महताब न देखो;
    ऐसे भी तुम ख़्वाब न देखो!
    ~ Zafar Kaleem
  • दिल से जब लौ लगी नहीं होती; <br/>
आँख भी शबनमी नहीं होती!
    दिल से जब लौ लगी नहीं होती;
    आँख भी शबनमी नहीं होती!
    ~ Ved Rahi
  • चैन पड़ता नहीं है सोने में;<br/>सूइयाँ तो नहीं बिछौने में!
    चैन पड़ता नहीं है सोने में;
    सूइयाँ तो नहीं बिछौने में!
    ~ Ehsas Muradabadi