• मीठी मुस्कान, तीखा गुस्सा और नमकीन आँसू, इन तीनों के स्वाद से बनी है ज़िंदगी
इसे मज़े से जियें।<br/>
सुप्रभात!
    मीठी मुस्कान, तीखा गुस्सा और नमकीन आँसू, इन तीनों के स्वाद से बनी है ज़िंदगी इसे मज़े से जियें।
    सुप्रभात!
  • कुछ नेकियाँ ऐसी भी होनी चाहिए,<br/>
जिनका खुदा के सिवा कोई गवाह ना हो।<br/>
सुप्रभात!
    कुछ नेकियाँ ऐसी भी होनी चाहिए,
    जिनका खुदा के सिवा कोई गवाह ना हो।
    सुप्रभात!
  • ध्यान का अर्थ है भीतर से मुस्कुराना और सेवा का अर्थ है इस मुस्कुराहट को औरों तक पँहुचाना।<br/>
सुप्रभात!
    ध्यान का अर्थ है भीतर से मुस्कुराना और सेवा का अर्थ है इस मुस्कुराहट को औरों तक पँहुचाना।
    सुप्रभात!
  • सच्चे और शुभचिंतक लोग हमारे जीवन में सितारों की तरह होते हैं...
    वो चमकते तो सदैव ही रहते है परंतु दिखाई तभी देते हैं जब अंधकार छा जाता है।
    सुप्रभात!
  • उदासियों की वजह तो बहुत है जिंदगी में;
    पर बेवजह खुश रहने का मज़ा ही कुछ और है।
    इसलिए हमेशा खुश रहो।
    सुप्रभात!
  • खिलते फूल जैसे लबों पर हंसी हो;<br/>
ना कोई गम हो ना कोई बेबसी हो;<br/>
सलामत रहे ज़िंदगी का यह सफ़र;<br/>
जहाँ आप रहो वहाँ बस ख़ुशी ही ख़ुशी हो।<br/>
सुप्रभात!
    खिलते फूल जैसे लबों पर हंसी हो;
    ना कोई गम हो ना कोई बेबसी हो;
    सलामत रहे ज़िंदगी का यह सफ़र;
    जहाँ आप रहो वहाँ बस ख़ुशी ही ख़ुशी हो।
    सुप्रभात!
  • तब तक कमाओ जब तक महंगी चीज़ सस्ती ना लगने लगे;<br/>
चाहे वो सम्मान हो या सामान।<br/>
सुप्रभात!
    तब तक कमाओ जब तक महंगी चीज़ सस्ती ना लगने लगे;
    चाहे वो सम्मान हो या सामान।
    सुप्रभात!
  • सकारात्मक सोच आपके जीवन को सही दिशा देती है।<br/>
सही सोचें, सही समझें, सही दिशा मे बढें।<br/>
सुप्रभात!
    सकारात्मक सोच आपके जीवन को सही दिशा देती है।
    सही सोचें, सही समझें, सही दिशा मे बढें।
    सुप्रभात!
  • दो पल की ज़िन्दगी है इसे जीने के सिर्फ दो असूल बना लो,<br/>
रहो तो फूलों की तरह और बिखरो तो खुशबू की तरह।<br/>
सुप्रभात!
    दो पल की ज़िन्दगी है इसे जीने के सिर्फ दो असूल बना लो,
    रहो तो फूलों की तरह और बिखरो तो खुशबू की तरह।
    सुप्रभात!
  • स्वर्ग का सपना छोड़ दो,<br/>
नरक का डर छोड़ दो,<br/>
कौन जाने क्या पाप, क्या पुण्य,<br/>
बस किसी का दिल न दुखे अपने स्वार्थ के लिए,<br/>
बाक़ी सब कुदरत पर छोड़ दो।<br/>
सुप्रभात!
    स्वर्ग का सपना छोड़ दो,
    नरक का डर छोड़ दो,
    कौन जाने क्या पाप, क्या पुण्य,
    बस किसी का दिल न दुखे अपने स्वार्थ के लिए,
    बाक़ी सब कुदरत पर छोड़ दो।
    सुप्रभात!