• बाहर निकलो तो कोरोना, घर में बैठो तो भूकंप और ज़रा सी खिड़की खोल के झाँक लो तो टिड्डियाँ!<br/>
कुदरत भी गिन-गिन कर बदले ले रही है!
    बाहर निकलो तो कोरोना, घर में बैठो तो भूकंप और ज़रा सी खिड़की खोल के झाँक लो तो टिड्डियाँ!
    कुदरत भी गिन-गिन कर बदले ले रही है!
  • सरकार शराब बेच कर चावल देगी और बंदा चावल देकर शराब ले लेगा!<br/>
Recycling
    सरकार शराब बेच कर चावल देगी और बंदा चावल देकर शराब ले लेगा!
    Recycling
  • राम युग में दूध मिले और कृष्ण युग में घी;<br/>
कोरोना युग में दारु मिले `डिस्टेंस` बना कर पी!
    राम युग में दूध मिले और कृष्ण युग में घी;
    कोरोना युग में दारु मिले "डिस्टेंस" बना कर पी!
  • शादियों में सबसे ज़्यादा मज़ा तो तब आता है जब DJ के पास आकर लड़कियाँ खड़ी होती हैं और उन्हें देख 4-5 लड़के अपने अंदर माईकल जैक्सन की आत्मा घुसेड़ लेते हैं!
    शादियों में सबसे ज़्यादा मज़ा तो तब आता है जब DJ के पास आकर लड़कियाँ खड़ी होती हैं और उन्हें देख 4-5 लड़के अपने अंदर माईकल जैक्सन की आत्मा घुसेड़ लेते हैं!
  • माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर,<br/>
कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर।<br/><br/>

अर्थ: कोई व्यक्ति लम्बे समय तक हाथ में लेकर मोती की माला तो घुमाता है, पर उसके मन का भाव नहीं बदलता, उसके मन की हलचल शांत नहीं होती। कबीर की ऐसे व्यक्ति को सलाह है कि हाथ की इस माला को फेरना छोड़ कर मन के मोतियों को बदलो या फेरो।<br/>
कबीर दास जयंती की शुभ कामनायें!
    माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर,
    कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर।

    अर्थ: कोई व्यक्ति लम्बे समय तक हाथ में लेकर मोती की माला तो घुमाता है, पर उसके मन का भाव नहीं बदलता, उसके मन की हलचल शांत नहीं होती। कबीर की ऐसे व्यक्ति को सलाह है कि हाथ की इस माला को फेरना छोड़ कर मन के मोतियों को बदलो या फेरो।
    कबीर दास जयंती की शुभ कामनायें!
  • प्रत्येक लिखी हुई बात को प्रत्येक पढ़ने वाला नहीं समझ सकता!<br/>
क्योंकि लिखने वाला भावनाएं लिखता है और लोग केवल शब्द पढ़ते हैं!
    प्रत्येक लिखी हुई बात को प्रत्येक पढ़ने वाला नहीं समझ सकता!
    क्योंकि लिखने वाला भावनाएं लिखता है और लोग केवल शब्द पढ़ते हैं!
  • ज़िंदगी में तकलीफ़ `अकेलेपन` से नहीं, बल्कि अंदर के `शोर` से होती है!
    ज़िंदगी में तकलीफ़ "अकेलेपन" से नहीं, बल्कि अंदर के "शोर" से होती है!
  • आप खाने में क्या लेते हैं?<br/>
विदेशी: सलाद!<br/>
भारतीय: ये तो हम खाने के इंतज़ार में ही निपटा देते हैं!
    आप खाने में क्या लेते हैं?
    विदेशी: सलाद!
    भारतीय: ये तो हम खाने के इंतज़ार में ही निपटा देते हैं!
  • हम तो उसी दिन आत्मनिर्भर हो गए थे!<br/>
जिस दिन कैटेगरी वाले कॉलम में `General` लिखा था!
    हम तो उसी दिन आत्मनिर्भर हो गए थे!
    जिस दिन कैटेगरी वाले कॉलम में "General" लिखा था!
  • आज के ज़माने में पैसे की कोई कीमत नहीं है!<br/>
20 लाख करोड़ कहाँ से आये और कहाँ गए किसी को कुछ पता ही नहीं चला!
    आज के ज़माने में पैसे की कोई कीमत नहीं है!
    20 लाख करोड़ कहाँ से आये और कहाँ गए किसी को कुछ पता ही नहीं चला!