• हम उस बेवफा से दिल लगा बैठे,<br/>
खली फोकट अपनी सुकून की माँ-बहन एक करवा बैठे,<br/>
वो तो चुप-चाप सो गई किसी के बिस्तर पे जाकर,<br/>
हम अपनी ही झांटों में आग लगा बैठे।
    हम उस बेवफा से दिल लगा बैठे,
    खली फोकट अपनी सुकून की माँ-बहन एक करवा बैठे,
    वो तो चुप-चाप सो गई किसी के बिस्तर पे जाकर,
    हम अपनी ही झांटों में आग लगा बैठे।
  • मुरझाये हुए फूल हम पानी देकर खिला देते हैं;<br/>
जब आती है उनकी याद तो बस उनकी फ़ोटो देख कर हिला लेते हैं!
    मुरझाये हुए फूल हम पानी देकर खिला देते हैं;
    जब आती है उनकी याद तो बस उनकी फ़ोटो देख कर हिला लेते हैं!
  • बहुत से लोगों को इश्क़ में पिघलते देखा है;<br/>
किसी को झाड़ियों में और किसी को गाड़ियों में हिलते देखा है!
    बहुत से लोगों को इश्क़ में पिघलते देखा है;
    किसी को झाड़ियों में और किसी को गाड़ियों में हिलते देखा है!
  • नुमाइश ए जमाल है कि मुफलिसी से जंग है;<br/>
तुम्हारे जिस्म पर लिबास चुस्त है कि तंग है!
    नुमाइश ए जमाल है कि मुफलिसी से जंग है;
    तुम्हारे जिस्म पर लिबास चुस्त है कि तंग है!
  • वो पेड़ ही क्या जो वक़्त के साथ बड़ा ना हो जाये;<br/>
और वो चूची ही क्या जिसे देखते ही लंड खड़ा ना हो जाये!
    वो पेड़ ही क्या जो वक़्त के साथ बड़ा ना हो जाये;
    और वो चूची ही क्या जिसे देखते ही लंड खड़ा ना हो जाये!
  • कुछ इस तरह इश्क़ में जिस्म और रूहें सट्ट जाती हैं;<br/>
तड़प लंड की होती है और चूत फट जाती है!
    कुछ इस तरह इश्क़ में जिस्म और रूहें सट्ट जाती हैं;
    तड़प लंड की होती है और चूत फट जाती है!
  • कैसा ये इश्क़, मोहब्बत और प्यार है;<br/>
कहीं तड़प रहा है लंड और कहीं चूत बेक़रार है!
    कैसा ये इश्क़, मोहब्बत और प्यार है;
    कहीं तड़प रहा है लंड और कहीं चूत बेक़रार है!
  • महसूस करनी थी तेरे दिल कि धड़कन ऐ ज़ालिम;<br/>
यही वजह थी तेरे ब्लाउज में हाथ डालने की!
    महसूस करनी थी तेरे दिल कि धड़कन ऐ ज़ालिम;
    यही वजह थी तेरे ब्लाउज में हाथ डालने की!
  • हर पैंटी में एक राज़ होता है,<br/>
हर ब्रा के खुलने का एक अंदाज़ होता है,<br/>
जब तक ना लगे लंड की कोई ठोकर,<br/>
हर लड़की को अपनी चूत पर नाज़ होता है!
    हर पैंटी में एक राज़ होता है,
    हर ब्रा के खुलने का एक अंदाज़ होता है,
    जब तक ना लगे लंड की कोई ठोकर,
    हर लड़की को अपनी चूत पर नाज़ होता है!
  • थोड़ा हवस भी लाजमी है इश्क़ में साहब;<br/>
वरना शुद्ध इश्क को वो मर्दाना कमजोरी समझेगी!
    थोड़ा हवस भी लाजमी है इश्क़ में साहब;
    वरना शुद्ध इश्क को वो मर्दाना कमजोरी समझेगी!