• सपनो का मतलब!

    एक नवविवाहित जोड़ा दोपहर को अपने घर में सो रहा था। जागने पर पत्नी ने अपने पति से कहा, "जानते हो, अभी-अभी मैंने क्या सपना देखा?"

    पति: क्या?

    पत्नी: मैंने देखा कि तुम मेरे लिये नया सोने का हार लेकर आये हो। इस सपने का क्या क्या अर्थ हो सकता है?

    पति: यह तुम आज रात को जान जाओगी।

    रात को जब पति घर लौटा तो उसके हाथ में एक पैकेट था जो उसने अपनी पत्नी को दिया।

    मन ही मन खुश होते हुये, जब पत्नी ने उस पैकेट को खोला तो उसमें एक पुस्तक निकली जिसका नाम था, "1001 सपनों के अर्थ।"
  • एक ख़ास मुरब्बा!

    सामग्री:

    एक पति, कर्कश वाणी, व्यंगात्मक शब्द रचना, स्वाद के लिए धमकी की पत्तियां।

    बनाने की विधि:

    सुबह-सुबह पतिदेव के ऊपर ठण्डा पानी डालकर उन्हें जगाएं।

    जब पतिदेव अच्छी तरह धुल जाएँ तब उन्हें एक दम काली, ठण्डी, बिना शक्कर की बे-जायका चाय निगलने के लिए मजबूर करें साथ ही साथ पतिदेव को धीमे-धीमे कर्कश वचनों की आंच में पकने दें। जब वह थोड़े लाल-पीले होने लगें तो उन पर ससुराल की झूठी-सच्ची मनगढंत शब्दों की व्यंगात्मक संरचना का गरम मसाला डालिए। जब पतिदेव उबलने लगें तथा प्रेशर-कुकर की सीटी की तरह खड़खड़ाने लगें तो चुपचाप पलंग पर लेट कर सिसकियां भरने लगिए। अब पतिदेव को ठण्डा होने के लिए छोड़ दीजिए। आधे घंटे बाद जब दफ्तर जाने के लिए उन्हें देर होगी तो वह खुद ही मनाने चले आएंगे। लीजिए, तैयार हो गया पतिदेव का लजीज मुरब्बा।

    अब इन्हें या तो आप फरमाइशों की चपाती के साथ चखिए या फिर आश्वासनों के ब्रेड पर लगा कर खाइए!

    वैधानिक चेतावनी: यह व्यंजन दांपत्य जीवन के लिए हानिकारक है!!!
  • गीता सार!

    पिता, अपने बेटे से: ओ बेवकूफ़, मैंने तुमको गीता दी थी पढ़ने के लिए क्या तुमने गीता पढ़ी? कुछ दिमाग में घुसा?

    पुत्र: हाँ पिता जी, पढ़ ली और अब आप मरने के लिए तैयार हो जाओ (इतना कहते बेटे ने पिता की कनपटी पर तमंचा रख दिया)।

    पिता: बेटा ये क्या कर रहे हो? मैं तुम्हारा बाप हूँ।

    पुत्र: पिता जी, ना कोई किसी का बाप है और ना कोई किसी का बेटा। ऐसा गीता में लिखा है।

    पिता: बेटा मैं मर जाऊंगा।

    पुत्र: पिता जी शरीर मरता है, आत्मा कभी नही मरती। आत्मा अजर है, अमर है।

    पिता: बेटा मजाक मत करो गोली चल जाएगी और मुझको दर्द से तड़पाकर मार देगी।

    पुत्र: क्यों व्यर्थ चिंता करते हो? किससे तुम डरते हो? गीता में लिखा है - नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि, नैनं दहति पावकः

    आत्मा को ना पानी भिगो सकता है और ना ही तलवार काट सकती, ना ही आग जला सकती। किस लिए डरते हो तुम?

    पिता: बेटा, अपने भाई बहनों के बारे में तो सोच, अपनी माँ के बारे में भी सोच।

    पुत्र: इस दुनिया में कोई किसी का नही होता। संसार के सारे रिश्ते स्वार्थों पर टिके हैं। ये भी गीता में ही लिखा है।

    पिता: बेटा मुझको मारने से तुझे क्या मिलेगा?

    बेटा: अगर इस धर्म युद्ध में आप मारे गए तो आपको स्वर्ग प्राप्ति होगी। मुझको आपकी संपत्ति प्राप्त होगी।

    पिता: बेटा ऐसा जुर्म मत कर।

    पुत्र: पिता जी आप चिंता ना करें। जिस प्रकार आत्मा पुराने जर्जर शरीर को त्याग कर नया शरीर धारण करती है, उसी प्रकार आप भी पुराने जर्जर शरीर को त्याग कर नया शरीर धारण करने की तयारी करें।

    अलविदा।

    शिक्षा - कलयुग की औलादों को सतयुग, त्रेतायुग या द्वापर युग की शिक्षा ना दें, क्योकि अकड़ हम सहते नहीं और भाव किसी को देते नहीं।
  • स्टेट बैंक की कहानी!

    जरूरी नहीं, कि पापों के प्रायश्चित के लिए दान पुण्य ही किया जाए। स्टेट बैंक में खाता खुलवा कर भी प्रायश्चित किया जा सकता है।

    छोटा मोटा पाप हो, तो बैलेंस पता करने चले जाएँ। चार काउन्टर पर धक्के खाने के बात पता चलता है, कि बैलेंस गुप्ता मैडम बताएगी। गुप्ता मैडम का काउन्टर कौन सा है, ये पता करने के लिए फिर किसी काउन्टर पर जाना पड़ता है।

    लेवल वन कम्प्लीट हुआ। यानि गुप्ता मैडम का काउन्टर पता चल गया है। लेकिन अभी थोड़ा वेट करना पड़ेगा, क्योंकि मैडम अभी सीट पर नहीं है।

    आधे घंटे बाद चश्मा लगाए, पल्लू संभालती हुई, इंटरनेट की 2G स्पीड से भी धीरे चलती हुई गुप्ता मैडम सीट पर विराजमान हो जाती है। आप मैडम को खाता नंबर देकर बैलेंस पूछते हैं।

    मैडम पहले तो आपको इस तरह घूरती हैं, जैसे आपने उसकी बेटी का हाथ मांग लिया है। आप भी अपना थोबड़ा ऐसे बना लेते हैं जैसे सुनामी में आपका सबकुछ उजड़ गया है, और आज की तारीख में आपसे बड़ा लाचार दुखी कोई नहीं है।

    गुप्ता मैडम को आपके थोबड़े पर तरस आ जाता है, और बैलेंस बताने जैसा भारी काम करने का मन बना लेती है। लेकिन इतना भारी काम, अकेली अबला कैसे कर सकती है? तो मैडम सहायता के लिए आवाज लगाती है, "मिश्रा जी, ये बैलेंस कैसे पता करते है?"

    मिश्रा जी, "अबला की करुण पुकार सुनकर अपने ज्ञान का खजाना खोल देते हैं। पहले तो खाते के अंदर जाकर क्लोजिंग बैलेंस पर क्लिक करने पर बैलेंस आ जाता था। लेकिन अभी सिस्टम चेंज हो गया है। अभी आप f5 दबाएँ, और इंटर मार दे तो बैलेंस दिखा देगा।"

    गुप्ता मैडम चश्मा ठीक करती हैं, तीन बार मॉनिटर की तरफ और तीन बार की-बोर्ड की तरफ नजर मारती हैं। फिर उंगलियाँ की-बोर्ड पर ऐसे फिरातीं है, जैसे कोई तीसरी क्लास का लड़का वर्ल्ड मैप में सबसे छोटा देश मस्कट ढूंढ रहा हो।

    मैडम फिर मिश्रा जी को मदद के लिए पुकारती हैं, "मिश्रा जी, ये f5 किधर है?"

    मैडम की उम्र पचास से ऊपर होने के कारण शायद मिश्रा जी पास आकर मदद करने की जहमत नहीं उठाते।इसलिए वहीं बैठे बैठे जोर से बोलते हैं, "की-बोर्ड में सबसे ऊपर देखिये मैडम।"

    "लेकिन सबसे ऊपर तो सिर्फ तीन बत्तियां जल रही हैं?"

    " हाँ उन बत्तियों के नीचे है। लम्बी लाईन है f1 से लेकर f12 तक।"

    और फिर मैडम को f5 मिल जाता है। मैडम झट से बटन दबा देती है। मोनिटर पर आधे घंटे जलघड़ी, ( कुछ लोग उसे डमरू समझते हैं) बनी रहती है।

    अंत में एक मैसेज आता है, "Session expired. Please check your connection."

    मैडम अपने हथियार डाल देती है। एक नजर, आपके गरीबी लाचारी से पुते चेहरे पर डालती है और कहती है, "सॉरी, सर्वर में प्रॉब्लम है।"

    कहने का टोन ठीक वैसा ही होता है, जैसे पुरानी फिल्मों में डॉक्टर ऑपरेशन थियेटर से बाहर आ कर कहता था, "सॉरी! हमने बहुत कोशिश की पर ठाकुर साहब को नहीं बचा पाए।"