• हमेशा बोलना ज़रूरी नहीं!

    कार वाले को ट्रैफिक पुलिस ने रोका और पूछा: क्यों, आपने कार के सामने की बत्तियाँ क्यों नहीं जलाई हैं?

    कार वाला: बात यह है कि हवालदार साहब, अभी-अभी गाड़ी एक ट्रक से टकरा गई और दोनों ही बत्तियाँ फूट गई।

    ट्रैफिक पुलिस वाले: अच्छा तुम्हारा लाइसेंस कहाँ है?

    कार वाला: वह अभी निकालना है।

    ट्रैफिक पुलिस: ठीक है, एक साथ दो अपराध करने के कारण मुझे आपको गिरफ्तार करना पड़ेगा।

    तभी कार वाले की पत्नी बोली: रुकिए हवालदार साहब। इनकी बातों पर ध्यान मत दीजिए। जब यह अधिक पी लेते हैं तो ऐसी ही बातें करते हैं।
  • ज़िन्दगी के पड़ाव!

    विभिन्न आयु के छात्रो का सबसे अच्छा सामूहिक उदाहरण:

    पहली से तीसरी कक्षा तक: मुझे तो पूरा पर्चा आता था।

    चौथी से छटी कक्षा तक: यार 8 नंबर वाला प्रश्न तो बहुत मुश्किल था मैंने सिर्फ उसे ही छोड़ा है।

    सातवी से दसवी कक्षा तक: मैंने तो सिर्फ मुख्य ही प्रश्न किये हैं।

    ग्यारवी कक्षा में: मुझे लगता है पास होने के लिए चार पाठ पढ़ना बहुत है।

    बाहरवीं कक्षा: कल पेपर कौन सा है यार।

    और कॉलेज के दिनों में: सालों बता तो देते आज पेपर है, मैं तो पेन भी नहीं लाया।
  • कहानी जुगाड़ की!

    पिता लड़के से: मैंने तुम्हारी शादी के लिए एक लड़की देखी है।

    लड़का: लेकिन मैं अपनी मर्जी से शादी करूँगा।

    पिता: लेकिन वो लड़की बिल गेट्स की लड़की है।

    लड़का: यदि ऐसा है तो ठीक है।

    अगले दिन पिता बिल गेट्स के पास जाता है।

    पिता: मैंने आपकी लड़की की शादी के लिए एक अच्छा लड़का देखा है।

    बिल गेट्स: लेकिन मेरी लड़की अभी शादी के लिए छोटी है।

    पिता: लेकिन वो लड़का वर्ल्ड बैंक का वाइस प्रेसिडेंट है।

    बिल गेट्स: यदि ऐसा है तो ठीक है।

    अगले दिन पिता वर्ल्ड बैंक प्रेसिडेंट के पास जाता है।

    पिता: मैंने आपके बैंक के वाइस प्रेसिडेंट बनाने लायक एक अच्छा लड़का देखा है।

    प्रेसिडेंट: लेकिन हमारे बैंक मैं पहले से ही वाइस प्रेसिडेंट है।

    पिता: लेकिन वो लड़का बिल गेट्स का दामाद है।

    प्रेसिडेंट: यदि ऐसा है तो ठीक है।
  • बॉस का आदेश!

    एक बार कुछ लड़कियां शहर से गाँव घूमने आई थी। जब वो वापस लौट रही थी तो रास्ते में जिस बस में वे सफर कर रहीं थी, कुछ डाकुओं ने उस बस को घेर लिया। बस लूटने वाले दो डाकुओं ने पिस्तौल दिखाकर बस जंगल में रुकवा ली, तो सभी मुसाफिरों में सन्नाटा छा गया।

    एक डाकू ने अपने साथी से कहा, "हम पुरुषों को लूटेंगे और सभी औरतों को अपने साथ ले जाएँगे।"

    दूसरा डाकू जो पहले वाले से कमजोर था बोला, "नहीं, हम सारा सामान लूटेंगे, औरतों को कुछ नहीं कहेंगे।"

    यह सुन पीछे की सीट पर बैठी लड़कियों ने आपस में खुसुर - फुसुर की और फिर उनमे से एक दूसरे डाकू से बोली, "ऐ, तुम अपने बॉस का आदेश मानो। जैसा वो कह रहा है वैसा करो।"