• कोई इसकी भी सुन लो!

    एक आदमी सड़क पर बेहोश हो गया। उसके इर्द-गिर्द भीड़ जमा हो गई, हर कोई उसे होश में लाने के लिए सलाहें देने लगा। भीड़ में से एक बुढ़िया बोली, "बेचारे को थोड़ी ब्रांडी दे दो।"

    कोई बोला, "इसके मुंह पर पानी के छींटे मारो।"

    "इसे ब्रांडी दो।" बुढिया फिर बोली।

    "इसे पंखा करो।" कोई बोला।

    "इसे ब्रांडी दो।" बुढिया बोली।

    "इसे अस्पताल ले जाओ।" किसी ने कहा।

    "इसे ब्रांडी दो।" बुढिया फिर बोली।

    तभी बेहोश पड़ा आदमी उठकर बैठ गया और जोर से चिल्लाया, "आप सब लोग अपनी बकवास बंद कीजिये और उस बेचारी बुढिया की भी कोई सुन लो।"
  • पक्का भारतीय होने के लक्षण:

    1. होटल में खाने के बाद मुट्ठी भर सौंफ खाना।

    2. हवाई यात्रा के बाद बैग से टैग नहीं उतारना।

    3. सब्जी लेने के बाद मुफ़्त धनिये की मांग करना।

    4. दीवाली पर मिले गिफ्ट को रिश्तेदार को सरका देना।

    5. छह साल के बच्चे को 3 साल का बता कर आधा टिकट लेना।

    6. रिमोट से लेकर मोबाइल तक का पीठ ठोंक कर चलाना।

    7. शादी के कार्ड से गणेश जी उतारकर फ्रिज पर चिपकाना।

    8. मोलभाव करते वक्त पिछली दुकान का हवाला देना।

    9. गोलगप्पे खाने के बाद मुफ़्त में सुखी पापड़ी की जिद करना।

    10. नई कार लेने के बाद छह महीने तक सीट की पन्नी नहीं उतारना।
  • एक शादीशुदा की दुखी कलम से योग दिवस

    योग दिवस को मैं कुछ इस तरह से मना रहा हूँ,
    रात उसके पैर दबाए थे अब पोछा लगा रहा हूँ।

    धो रहा हूँ बर्तन और बना रहा हूँ चपाती,
    मेरे ख्याल से यही होती है कपालभाति।

    एक हाथ से पैसे देकर, दुजे हाथ में सामान ला रहा हूँ मैं,
    और इस प्रक्रिया को अनुलोम विलोम बता रहा हूँ मैं।

    सुबह से ही मैं घर के सारे काम कर रहा हूँ,
    बस इसी तरह से यारो प्राणायाम कर रहा हूँ।

    मेरी सारी गलतियों की जालिम ऐसी सजा देती हैं,
    योगो का महायोग अर्थात मुर्गा बना देती हैं।

    हे मोदी, हे रामदेव अगर आप गृहस्थी बसाते,
    तो हम योग दिवस नहीं पत्नी दिवस मनाते।
  • शराबी की होशियारी!

    एक बार एक शराबी रात के 12 बजे शराब की दुकान के मालिक को फ़ोन करता है और कहता है, "तेरी दुकान कब खुलेगी?"

    दुकानदार: सुबह 9 बजे।

    शराबी फिर थोड़ी देर बाद दोबारा दुकानदार को फ़ोन करके पूछता है, "तेरी दुकान कब खुलेगी?"

    दुकानदार: कहा ना सुबह 9 बजे।

    कुछ देर बाद शराबी फिर से दुकानदार को फ़ोन कर देता है और पूछता है,"भाई साहब आपकी दुकान कब खुलेगी?"

    दुकानदार: अबे तुम्हें कितनी बार बताऊँ सुबह 9 बजे खुलेगी इसीलिए सुबह 9 बजे आना और जो भी चाहिए हो ले जाना।

    शराबी: अबे, मैं तेरी दुकान के अन्दर से ही बोल रहा हूँ।

    दुकानदार जल्दी से दुकान पर गया और दुकान खोल कर चेक करने लगा। तभी पीछे से शराबी अाया और बोला, "चलो अब दुकान खोल ही ली है तो एक बोतल व्हिस्की की ही दे दो।"