• सिंधी का दिमाग!

    एक लड़का अण्डो से भरी टोकरी साइकिल पर रख कर जा रहा था कि अचानक साइकिल पत्थर से टकरा गयी और अण्डो वाली टोकरी गिर गयी और सभी अण्डे टूट गए।

    भीड़ इकठी हो गयी और सभी चिलाये: देख कर चलो भाई, कितनी गन्दगी कर दी?

    भीड़ में से एक काका बोले, "इतना चिल्लाने से अच्छा है यह सोचो इसका मालिक इसकी क्या हालात करेगा? पगार में से पैसे काट लेगा। इसकी कुछ मदद करो, लो मेरी तरफ से 10/- रूपये।"

    सभी ने सहानभूति जताते हुए 10 -10 रूपये दिए।

    लड़का खुश हो गया, क्योंकि मिली हुई रकम अण्डों की कीमत से ज्यादा थी।

    सभी के चले जाने के बाद एक व्यक्ति लड़के से बोला, "बेटे अगर काका ना होते तो मालिक को तू क्या जवाब देता?"

    लड़का: वो काका ही मालिक है और वो सिंधी है।
  • कुछ मज़ेदार बातें!

    1. अगर हथेली पर तम्बाकू-चूने के घर्षण से बिजली उत्पन्न हो सकती तो आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा बिजली उत्पादक देश होता।

    2. जिस तरह की गरमी पड़ रही है, मोदी सरकार को अच्छे दिन लाने के बजाय ठन्डे दिन लाने का प्रयास करना चाहिए।

    3. रोमिंग पर जब इनकमिंग के भी पैसे कटते हैं, तब समझ में आता है कि क्षेत्रवाद देश के लिए कितना घातक है।

    4. ज्यादा पैसा आ जाए तो नींद नहीं आती... नींद आये तो ज्यादा पैसा नहीं आता।

    5. फेसबुक वह जगह है जहां चूहे को देखकर हवा टाइट हो जाने वाले भी अपनी हॉबीज में 'Adventure Sports' लिखते हैं।

    6. कोई सुबह 10 बजे सोकर उठे तो जरूरी नहीं कि वो आलसी ही हो ... हो सकता है कि उसके सपने बड़े हों।

    7. कल को कोई अपनी पत्नी पर ये इलज़ाम भी लगा सकता है कि तुम रोज़-रोज़ मैगी खिला कर मुझे मारने की कोशिश कर रही हो।

    8. दिल्ली की एक लड़की को 12th की परीक्षा में 99।2% मार्क्स मिले हैं। अरे इतना तो कभी हमारा फ़ोन भी चार्ज नहीं होता।

    9. पत्नी जब गुस्सा होकर मायके जाती है तो 10 मिनट में सबकुछ पैक कर लेती है... लेकिन पता नहीं क्यूँ छुट्टी में घूमने की पैकिंग करने के लिए उसे एक सप्ताह का समय भी कम पड़ जाता है।
  • सोशल मीडिया की क्रांति!

    ट्वीटर, फेसबुक और व्हाट्सएप अपने प्रचंण्ड क्रांतिकारी दौर से गुजर रहा है। हर नौसिखीया क्रांति करना चाहता है। कोई बेडरूम में लेटे-लेटे गौ-हत्या करने वालों को सबक सिखाने की बातें कर रहा है तो किसी के इरादे सोफे पर बैठे बैठे महंगाई, बेरोजगारी या बांग्लादेशियों को उखाड़ फेंकने के हो रहे हैं।

    हफ्ते में एक दिन नहाने वाले लोग स्वच्छता अभियान की खिलाफत और समर्थन कर रहे हैं। अपने बिस्तर से उठकर एक गिलास पानी लेने पर नोबेल पुरस्कार की उम्मीद रखने वाले बता रहे हैं कि माँ-बाप की सेवा कैसे करनी चाहिए।

    जिन्होंने आज तक बचपन में कंचे तक नहीं जीते वह बता रहे हैं कि भारत रत्न किसे मिलना चाहिये।

    जिन्हें गली क्रिकेट में इसी शर्त पर खिलाया जाता था कि बॉल कोई भी मारे पर अगर नाली में गई तो निकालना तुझे ही पड़ेगा वो आज कोहली को समझाते पाए जायेंगे कि उसे कैसे खेलना है।

    देश में महिलाओं की कम जनसंख्या को देखते हुए उन्होंने नकली ID बनाकर जनसंख्या को बराबर कर दिया है।

    जिन्हें यह तक नहीं पता कि हुमायूं, बाबर का कौन था वह आज बता रहे हैं कि किसने कितनों को काटा था।

    कुछ दिन भर शायरियां पेलेंगे जैसे 'गालिब' के असली उस्ताद तो यहीं बैठे हैं।

    जो नौजवान एक बाल तोड़ हो जाने पर रो-रो कर पूरे मोहल्ले में हल्ला मचा देते हैं, वे देश के लिए सिर कटा लेने की बात करते दिखेंगे।

    किसी भी पार्टी का समर्थक होने में समस्या यह है कि भाजपा समर्थक को अंधभक्त, आप समर्थक उल्लू, तथा कांग्रेस समर्थक बेरोजगार करार दे दिये जाते हैं।

    कॉपी पेस्ट करने वालों के तो कहने ही क्या। किसी की भी पोस्ट चेप कर ऐसे व्यवहार करेंगे जैसे साहित्य की गंगा उसके घर से ही बहती है और वो भी 'अवश्य पढ़ें' तथा 'मार्केट में नया है' की सूचना के साथ।

    एक कप दूध पी लें तो दस्त लग जाए ऐसे लोग हेल्थ की टिप दिए जा रहे हैं लेकिन समाज के असली जिम्मेदार नागरिक हैं।

    टैगिये... इन्हें ऐसा लगता है कि जब तक ये गुड मॉर्निंग वाले पोस्ट पर टैग नहीं करेंगे तब तक लोगों को पता ही नहीं चलेगा कि सुबह हो चुकी है।

    जिनकी वजह से शादियों में गुलाब जामुन वाले स्टॉल पर एक आदमी खड़ा रखना जरूरी है वो आम बजट पर टिप्पणी करते हुए पाये जाते हैं।

    कॉकरोच देख कर चिल्लाते हुये दस किलोमीटर तक भागने वाले पाकिस्तान को धमका रहे होते हैं कि "अब भी वक्त है सुधर जाओ"।

    क्या वक्त आ गया है वाकई। धन्य है व्हाट्सएप, फेसबुक और ट्वीटर युग के क्रांतिकारी।
  • ये पहली बार है!

    एक दंपत्ति ने जब अपनी शादी की 25 वीं वर्षगांठ मनाई तो एक स्थानीय समाचारपत्र का संवाददाता उनका साक्षात्कार लेने उनके घर जा पहुंचा। दरअसल वे दंपत्ति अपने शांतिपूर्ण और सुखमय विवाहित जीवन के लिये पूरे कस्बे में प्रसिध्द हो चुके थे। उनके बीच कभी कोई तकरार नाम मात्र के लिये भी नहीं हुई । संवाददाता उनके सुखी जीवन का राज जानने के लिये उत्सुक था।

    पति ने बताया - हमारी शादी के फौरन बाद हमलोग हनीमून मनाने के लिये शिमला गये हुये थे। वहां हम लोगों ने घुड़सवारी की। मेरा घोड़ा तो ठीक था पर जिस घोड़े पर मेरी पत्नी सवार थी वह जरा सा नखरैल था। उसने दौड़ते दौड़ते अचानक मेरी पत्नी को नीचे गिरा दिया।

    पत्नी ने घोड़े की पीठ पर हाथ फेरते हुये कहा - यह पहली बार है । और फिर उसी घोड़े पर सवार हो गई। थोड़ी दूर चलने के बाद घोड़े ने फिर उसे नीचे गिरा दिया।

    पत्नी ने अबकी बार कहा - यह दूसरी बार है। और फिर उसी घोड़े पर सवार हो गई।

    तीसरी बार जब घोड़े ने उसे नीचे गिराया तो मेरी पत्नी ने घोड़े से कुछ नहीं कहा, बस अपने पर्स से पिस्तौल निकाली और घोड़े को गोली मार दी।

    मैं अपनी पत्नी पर चिल्लाया - `ये तुमने क्या किया ! तुमने एक बेजुबान जानवर को मार दिया! क्या तुम पागल हो गई हो ?`

    पत्नी ने मेरी तरफ देखा और कहा - `ये पहली बार है!`

    और बस, तभी से हमारी जिंदगी सुख और शान्ति से चल रही है।