• सेर पे सवा सेर!

    पत्नी ने पति को मैसेज भेजा: ऑफिस से वापिस आते हुए सब्जियां लाना मत भूलना और हाँ, सविता आपको नमस्ते कह रही है!
    पति: ये सविता कौन है?
    पत्नी: कोई भी नही, मैं तो बस पक्का कर रही थी कि आपने मेरा मैसेज पूरा पढ़ा कि नही?

    कहानी में ट्विस्ट...

    पति: लेकिन मैं तो खुद सविता के ही साथ हूँ! तुम किस सविता की बात कर रही हो?
    पत्नी (गुस्से से): तुम अभी कहाँ हो?
    पति: सब्जी मार्किट के पास!
    पत्नी: रुको मैं अभी वहीं आती हूँ!

    10 मिनट के बाद पत्नी ने फिर मैसेज किया, "तुम हो कहाँ?"
    पति: मैं अभी ऑफिस में ही हूँ, अब तुम्हें जो भी सब्जी चाहिए खरीद लेना!
  • अनोखा दहेज़!

    एक बार एक अमीर आदमी एक लड़की के प्यार में पड़ गया और

    हर हालत में उससे शादी करना चाहता था।

    एक दिन उसने लड़की के पिता के आगे शादी का प्रस्ताव रख दिया कि

    अगर आप अपनी बेटी की शादी मेरे साथ करवा दें तो मैं उसके वजन के बराबर आपको सोना दूंगा।

    यह सुनकर लड़की के पिता कुछ सोच में पड़ गए और सोचने के बाद बोले कि

    आप मुझे कुछ समय दीजिये।

    आदमी: कुछ दिन और, क्या आप कुछ और सोचना चाहते हैं?

    पिता: नहीं, सोचना तो कुछ नहीं बस मेरी बेटी का वजन थोडा बढ़ जाये!
  • नशा करना बुरी बात है!

    एक बार एक आदमी सड़क किनारे बैठ कर बीड़ी पी रहा था, तभी वहां संता आता है और उस आदमी से कहता है, "भाई, नशा करना छोड़ दो और मेरे साथ चलो मै तुम्हे दिखाता हूँ ज़िन्दगी कितनी खूबसूरत है!"

    उस आदमी ने बीड़ी फेंक दी और संता के पीछे चल दिया!

    थोड़ी और आगे जाने के बाद संता को और उस आदमी को एक पठान मिलता है जो की पेड़ के नीचे बैठ कर चरस पी रहा होता है, उसको देख संता उससे भी कहता है,"भाई, नशा करना बुरी बात है, मेरे साथ चलो मैं तुम्हें दिखाता हूं कि ज़िन्दगी कितनी खूबसूरत है!"

    पठान भी चरस फेंकता है और संता के पीछे-पीछे चल पड़ता है!

    थोड़ी और आगे जाने के बाद संता को बंता दिखाई देता है, जो की शराब पी रहा होता है, बंता को देख संता उससे भी कहता है, " देखो भाई नशा करना बुरी बात है, मेरे साथ चलो मैं तुम्हें दिखाता हूं कि ज़िन्दगी कितनी खूबसूरत है!"

    संता की बात सुन बंता अपना पैग मेज पर रख देता है और संता को पीटने लगता है!

    यह सारा तमाशा देख पठान को गुस्सा आ जाता तो वह बंता से कहता, "तुम क्यों इस नेक इंसान को पीट रहे यह तो तुम्हारे भले के लिए ही कह रहा है!"

    पठान की बात सुन बंता जवाब देता है, " भला-वला गया भाड़ में, इस साले ने कल भांग पीकर मुझे भी ऐसे ही 3 घंटे तक सारे शहर में पैदल घुमाया था!"
  • बीवी चालीसा!

    बीवी सेवा सच्ची सेवा।।
    जो करे वो खाये मेवा।।
    जो बीवी के पाँव दबावै।।
    बस वैकुंठ परम पद पावै।।
    जो बीवी की करे गुलामी।।
    ना आये कोई परेशानी।।
    जो बीवी की धोवे साड़ी।।
    उसकी किस्मत जग से न्यारी।।
    भूत पिशाच निकट नहीं आवै।।
    जो बीवी के कीर्तन गावै।।
    हाथ जोड़ कर कीजिये।।
    पत्नी जी का ध्यान।।
    घर में खुशहाली रहे।।
    हो जाये कल्यान।।
    घरवाली को नमन कर।।
    माला लेकर हाथ।।
    मुख से पत्नी-वन्दना।।
    बोलो मेरे साथ।।
    जय पत्नी देवी कल्यानी।।
    माया तेरी ना पहचानी।।
    तुमसे सारे देवता हारे।।
    डर से थर-थर कांपें सारे।।
    नहीं चरित्र तुम्हरा कोई जाना।।
    नर क्या ईश्वर ना पहचाना।।
    अपरम्पार तुम्हारी माया।।
    कोई इसका पार न पाया।।
    लगो देखने में तुम गुड़िया।।
    हो लेकिन आफत की पुड़िया।।
    हे मेरे बच्चों की माता।।
    तुम हो मेरी भाग्यविधाता।।
    है बेलन हथियार तुम्हारा।।
    जब चाहा सिर पर दे मारा।।
    ऐसी तेरी निकले बोली।।
    जैसे हो बंदूक की गोली।।
    हम तुमसे डरते हैं ऐसे।।
    चोर पुलिस से डरता जैसे।।
    ऐसा है आतंक तुम्हारा।।
    बिच्छू जैसा डंक तुम्हारा।।
    करे पति जो पत्नी-सेवा।।
    मिलती उसको सच्ची मेवा।।
    पत्नी-वन्दना जो कोई गावे।।
    जीवन में कोई कष्ट न पावे।।
    प्रभु दीक्षित कर पत्नी-वन्दन।।
    पत्नी का कर लो अभिनन्दन।।
    वन्दहु पत्नी मुख-कमल।।
    गुण-अवगुण की खान।।
    मिले नहीं बिन आपके।।
    पतियों को सम्मान।।