• हिंदी मुहावरे ज्ञान बढाइये

    कुछ प्रसिद्ध मुहावरों का सही प्रयोग के लिये विस्तार में विवरण

    देवर को नहीं देगी पड़ोसी से फड़वा लेगी - मतलब किसी अपने का भला नहीं सोचने वाला जो किसी वस्तु को व्यर्थ बर्बाद कर देगा पर किसी अपने को नहीं देगा।

    इतने तो चुदाई के ना मिले जितने का लहंगा फट गया - इसका अर्थ किसी ऐसे काम से है जिसमें बहुत मेहनत हो और प्रतिफल बहुत कम।

    गाण्ड मराये बेगम, दण्ड भरे गुलाम - मतलब किसी के गुनाह की सजा किसी दूसरे को देना यानि चोरों का दण्ड फकीरों को।

    पकड़ने का पता नहीं और मुठ का ठेका - यह वाक्य उस वक्त के लिए है जब कोई बिना अनुभव वाला किसी अनुभव की आवश्यकता वाले की जगह को ले लेता है।

    साथ भी सोये और गांड भी छुपाये - मतलब बिना कुछ खोये कुछ पाने की आशा करना।

    शेर का लण्ड पकड़ना - यानि किसी ऐसे काम में उलझना जिससे छुटकारा पाना भी मुश्किल और करना भी मुश्किल

    झाँट उखाड़ने से मुर्दे हल्के नहीं होते - यानि किसी भारी काम को बहुत थोड़ा प्रयास करने से कुछ नहीं होता जैसे ओस चाटने से प्यास नहीं बुझती।
  • चूतियों की किस्म!

    चूतिये चार तरह के होते हैं...

    1) नस्लन: ये चूतिये केवल इसलिये चूतिये होते हैं, क्योंकि इनके बाप भी अपने समय के बहुत बड़े चूतिया थे।

    2) मसलन: ये वो होते हैं, जिनकी मिसालें दी जाती हैं।

    3) शक्लन: यह वो वाले होते हैं, जिनको सिर्फ शक्ल से ही पहचान लिया जाता है। बाकी टेस्ट की जरूरत ही नहीं पड़ती।

    4) बकलन: ये वो स्पेशल वैराइटी होती है, जो हर तरह से समझदार लगते हैं; लेकिन एकाएक कुछ ऐसा बोल या कर देते हैं, कि इनको भी चूतिया मानना ही पड़ता है।
  • एक पागल!

    एक पागल रोज कहता था - गुलेल बनाउंगा, कबूतर मारूंगा तो उसका इलाज शुरू किया गया!

    6 महीने के इलाज के बाद -

    डाक्टर: अब क्या करोगे?

    पागल: शादी करूंगा!

    डाक्टर: गुड, फिर?

    पागल: सुहागरात मनाऊंगा!

    डाक्टर: अच्छा कैसे?

    पागल: उसकी साड़ी उतारूंगा!

    डाक्टर: बहुत बढ़िया, फिर?

    पागल: उसका ब्लाउज उतारूंगा!

    डाक्टर: फिर?

    पागल: उसकी ब्रा उतारूंगा!

    डाक्टर: बहुत अच्छा, फिर?

    पागल: फिर क्या उसकी ब्रा की इलास्टिक से गुलेल बनाऊंगा, और कबूतर मारूंगा!

    डाक्टर: मादरचोद! दोबारा एडमिट करो इसको!
  • पांच सौ रूपए दूंगा!

    एक बार बंता संता के घर गया, उसने डोरबेल बजाई, संता की पत्नी ने दरवाजा खोला तो बंता ने पूछा जी, क्या संता जी घर पर है?

    संता की पत्नी ने जवाब दिया जी नहीं, वे बाजार गए है, अगर जरुरी काम है तो आप इन्तजार करें वे आते ही होंगे!

    बंता अन्दर चला गया थोड़ी देर बैठने के बाद इधर उधर की बातें होती रही फिर बंता एक दम से बोल पड़ा:

    जीतो जी, एक बात कहूँ आपके वक्ष काफी बड़े और सुन्दर हैं, और मैंने आज तक इतने बड़े वक्ष नहीं देखे है, अगर आप मुझे अपना एक वक्ष दिखा दें तो मैं आपको 500 रूपए दूंगा!

    जीतो ने थोड़ी देर सोचा और कहा क्या 500 रूपए सिर्फ दिखाने के!

    जीतो ने जल्दी से एक वक्ष कमीज से बाहर निकाला और बंता को दिखाया!

    बंता ने उसकी तारीफ करते हुए कहा कि अगर आप मुझे दूसरा वक्ष भी दिखा दो तो मैं तुम्हें और 500 रूपए दूंगा मैं तुम्हारे दोनों वक्षों को में देखना चाहता हूँ!

    जीतो ने तुरंत अपना कमीज को ऊपर उठाया और दोनों वक्ष उसके सामने कर दिए!

    बंता ने उन्हें देखा और 500 रूपए टेबल पर फेंकता हुआ उठ गया और कहने लगा अब मैं चलता हूँ और बंता वहां से निकल गया!

    बंता के जाने के थोड़ी देर बाद संता जब घर पहुंचा तो उसकी बीवी ने ख़ुशी प्रकट करते हुए कहा आज आपके एक बहुत अच्छे दोस्त आये थे उनका नाम बंता है और उन्होंने...... अभी उसकी बात पूरी भी नहीं हुई थी कि संता बोल पड़ा!

    क्या उसने हजार रूपए दिए, जो वो मुझसे उधार ले गया था?